लखनऊ। उत्तर प्रदेश में घाघरा नदी पर बना भिखारीपुर-सिकरौर तटबंध नाजुक स्थिति में पहुंच गया है। लगातार हो रहे तेज कटान के चलते तटबंध का करीब दो मीटर हिस्सा ही शेष बचा है।
गोंडा के अपर जिलाधिकारी (वित्त) विवेक पांडे ने मंगलवार को आईएएनएस को बताया कि सुजौली गांव के पास सोमवार को अचानक कटान तेज हो गया, जिसके चलते तटबंध का काफी हिस्सा पानी में बह गया। तटबंध को बचाने के लिए युद्धस्तर पर लगातार पत्थर के बोल्डर व मिट्टी डालने का सिलसिला जारी है। उन्होंने कहा कि शाम तक तटबंध को पांच मीटर चौ़डा कर लिया जाएगा। उन्होंने स्वीकार किया कि तटबंध टूटने से ब़डी तबाही आ सकती है। घाघरा का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से करीब 40 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है। इससे पहले बीते सप्ताह घाघरा के तेज बहाव से बाराबंकी जिले में एल्गिन-चरसारी तटबंध टूट चुका है, जिसकी चपेट में आकर बाराबंकी व सीमावर्ती गोंडा के करीब 50 से अधिक गांव जलमग्न हो गए थे।
प्रदेश के गोंडा, बाराबंकी, लखीमपुर खीरी, बहराइच, सीतापुर, पीलीभीत जिलों में घाघरा, शारदा और सरयू नदी में बाढ़ से करीब तीन लाख से अधिक लोगों की आबादी प्रभावित हुई है। खरीफ की सैक़डों एक़ड फसल तबाह हो चुकी है। उधर मथुरा जिले में खतरे के निशान के ऊपर बह रही यमुना का पानी निचले इलाकों के करीब एक दर्जन गावों में प्रवेश कर गया है। प्रभावित इलाकों में प्रशासन की तरफ से राहत व बचाव कार्य जारी है। अधिकारियों का कहना है कि बाराबंकी, गोंडा, बहराइच और लखीमपुर खीरी जिलों में बाढ़ से अब तक 20 मौतें हुई हैं।
भारत समाचार
उप्र में घाघरा पर बना तटबंध कमजोर प़डा, मरम्मत जारी





















