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भारत समाचार

बीटी बैंगन से रतलाम के किसान भी चिंतित

रतलाम। भारत में बीटी बैगन के प्रवेश को लेकर चल रही कवायद ने रतलाम के किसानों को भी चिंतित कर दिया है। उनका मानना है कि बीटी बैगन भारत आया तो टमाटर और कॉटन के बीज की तरह इसके बीज के मामले में भी यहां के किसान विदेश पर निर्भर हो जाएंगे। रतलाम के किसानों की चिंता बीटी बैगन के बीज में डाले जा रहे जीन को लेकर आ रही खबरों के कारण बढी हैं। किसानों का कहना है कि इसी तरह यदि हायब्रिड और स्वास्थ्य के लिए हानिकारण बीजों की बिक्री और उपयोग को अनुमति मिलती रहीं तो भारत में फसलों की देसी किस्में खत्म हो जाएंगी।
टमाटर, कॉटन, गेंदा आदि के मामले में ऎसा ही हो रहा हैं। टमाटर की देसी किस्म लगभग खत्म हो गई है। हायब्रिड फसलें आकार के मामले में तो रिकॉर्ड तोड रही है लेकिन स्वाद और सेहत की दृष्टि से बिलकुल भी उपयोगी नहीं है। यहीं कारण है कि जब कुछ किसानों से इस संबंध में चर्चा की गई तो उन्होंने बीटी बैगन का भारत में प्रवेश नहीं होने देने की वकालत की। दूसरे देश एक के बाद एक फसलों पर पेटेंट कराते जा रहे है। इससे कृषि प्रधान देश को बीज के मामले में विदेशों पर ही निर्भर होना पडेगा और वे स्वेच्छा से कोई बीज नहीं बो सकेंगे।

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