मुंबई। बजट में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढोतरी कर यूपीए सरकार मुश्किल में घिरती नजर आ रही है। इस मुद्दे पर एकजुट विपक्ष के कटौती प्रस्ताव के जरिए सरकार के बहुमत को चुनौती देने की तैयारियों के बीच सरकार की सहयोगी ममता बनर्जी की तृणमूल कांगे्रस और डीएमके ने कांग्रेस को सांसत में डाल दिया है। डीएमके ने फ्यूल की कीमतों में बढोतरी को तत्काल वापस लेने की मांग की है। पार्टी का कहना है खाद्य पदार्थो की कीमतें वैसे ही काफी अधिक हैं और ऎसे में फ्यूल की कीमतें बढने से इसमें और इजाफा होगा। डीएमके सुप्रीमो और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. करूणानिधि ने यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी को लिखी चिट्ठी में फ्यूल की कीमतों पर तुरंत ध्यान देने की अपील की है। उनका कहना है कि डीएमके इससे पहले भी तेल की कीमतों में बढोतरी का सार्वजनिक रूप से विरोध कर चुकी है। तृणमूल की मुखिया और रेल मंत्री ममता बनर्जी भी तेल की कीमतें बढने और रेलवे से 800 करोड सर्विस टेक्स वसूलने के बजट के प्रस्ताव से खुश नहीं हैं। प्रणव मुखर्जी ने पिछली बार भी रेल माल ढुलाई पर सर्विस टेक्स लगाया था जो बाद में ममता की मिन्नत पर हट गया था। प्रणव ने इस बजट में फिर माल भाडे पर सेवाकर लगा दिया है। तृणमूले के सूत्रों का कहना है कि इस मामले में रेल मंत्रालय से कोई विचार-विमर्श तक नहीं किया गया। तृणमूल के खेमे को तो इसमें साजिश की बू आ रही है। पार्टी के एक सांसद ने कहा, ममता दीदी इस मामले को आसानी से नहीं छोडेंगी। वे इस पर प्रधानमंत्री से बात करेंगी।