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भारत को और न्यूक्लियर टेस्ट की जरूरत नहीं

डीआरडीओ के पूर्व वैज्ञानिक के. संथानम ने यह कहकर एक विवाद छेड दिया था कि पोखरण-2 पूरी तरह सफल नहीं रहा और उससे अपेक्षित नतीजा नहीं निकला। परमाणु ऊर्जा आयोग अघ्यक्ष ने कहा कि हम सिमुलेशन क्षमता के प्रति बेहद आश्वस्त हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय परमाणु वैज्ञानिकों ने 1998 में पोखरण-2 टेस्ट के बाद जमा किए गए गति और विस्थापन डेटा के लिए त्रिआयामी सिमुलेशन के मान्यता प्राप्त उपकरणों को पहले ही वैलिडेट कर दिया था।
काकोडर ने कहा कि 18 दिसंबर, 1970 में अमरीका के ब्रेनब्रेरी परमाणु परीक्षणों के डेटा का उपयोग पृथ्वी की गति एवं विस्थापन के लिए अपने त्रिआयामी सिमुलेशन के मान्यकरण के लिए किया और इस मान्यकरण उपकरण का उपयोग मानकीकरण में किया गया। नतीजों के मान्यकरण के लिए टेस्ट की सीरीज की कोई जरूरत नहीं है।




















