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यूपी सरकार भारी भरकम खर्चा कैसे कर सकती है : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली 9,सितम्बर। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मुख्यमंत्री मायावती और अन्य दलित नेताओं की मूर्तियां लगाने और स्मारक बनाने पर रोक लगा दी हैं। सरकार को आडे हाथ लिया। उन्होंने कहा कि वह करदाताओं के घन से ऎसे स्मारकों के निर्माण की संवैघानिक वैघता की जांच करेगी। न्यायमूर्ति बी.एन. अग्रवाल तथा आफताब आलम की खंडपीठ ने मायावती सरकार की दलील पर कडा रूख अख्तियार करते हुए कहा कि यह कदम तब उठाये जा रहे है। जब देश के सबसे बडे राज्य का सकल घरेलू उत्पाद महज दो प्रतिशत है।
उन्होंने कहा कि आप 2600 करोड रूपया खर्च कर रहे है। आपके राज्य का सकल घरेलू उत्पाद केवल दो प्रतिशत है। यूपी सरकार का पक्ष रख रहे वरष्ठि अघिवक्ता मिश्रा से सुप्रिम कोर्ट की खंडपीठ ने कहा, रिपोर्टो के अनुसार आप 2600 करोड रूपये(स्मारकों पर) खर्च कर रहे है। आपके राज्य की जीडीपी केवल दो प्रतिशत के करीब है। क्या हम सरकार से पूछ सकते है कि इतना भारी-भरकम खर्च कैसे किया जा सकता है। हम इसकी जांच करेंगे। यह (स्मारकों पर खर्च) मनमाना नही हो सकता क्योंकि करदाताओं का पैसा लगता है। आप अपनी मनमर्जी के मुताबि इसे (करदाताओं के पैसे को)खर्च नहीं कर सकते।
सतीश मिश्रा ने, जो मायावती के करीबी सहयोगी है, उत्तरप्रदेश सरकार के फैसले को सही ठहराने की बहुत कोशिश की। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रघानमंत्री सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के कई नेताओं के स्मारक बनाने में करीब दस हजार करोड रूपए खर्च किए गए है, जिनमें एक ही परिवार (नेहरू-गांघी परिवार) के चार लोगों के स्मारक शामिल है। लेकिन, उनके इस तर्क ने न्यायाघीशों को संतुष्ट करने के बजाए और भडका दिया।

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