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भारत समाचार

बाबर: जुर्म की दुनिया

निर्माता:मुकेश शाह
निर्देशक: आशु त्रिखा
संगीत: आनंद राज आनंद
कलाकार: मिथुन चक्रवर्ती, सोहम, ओमपुरी, सुशांत सिंह, उर्वशी शर्मा, मुकेश तिवारी, टीनू आनंद, गोविंद नामदेव, शक्ति कपूर

समीक्षा:
बिहार और यूपी में राजनेताओं और शातिर अपराघियों की साठगांठ पर अब तक दर्जनों फिल्में बन चुकी है। इसी कडी में अब आप "बाबर" का नाम भी जोड सकते है। इस मूवी को यूपी की उन्ही लोकेशन पर शूट किया गया है, जहां कुछ साल पहले तक गैंगवॉर चरम पर पहुंच चुका था और जहां पुलिस भी जाने से कतराती है। इस फिल्म में निर्देशक ने दो शातिर क्रिमिनल्स के बीच की गैंगवॉर को बेहद खूंखार ढंग से दिखाया है। "बाबर" शुरू होती है यूपी के अमनगंज इलाके के तंग गलियों से। यहीं की गलियों में कसाई बडे कुरैशी (शक्ति कपूर) अपने चार भाइयों के साथ रहता है। कुरैशी की डिक्शनरी में रहम या माफी जैसे शब्द नहीं है। उसकी पूरी फैमिली का इलाके में ऎसा दबदबा है कि उसके घर तो दूर, मुहल्ले में भी किसी पुलिस वाले की आने की हिम्मत नही है। बडे कुरैशी का छोटा भाई बाबर (सोहम)तो 12 साल की उम्र से ही खौफ की दुनिया में अपनी दमदार पहचान बना लेता है। इस छोटी उम्र में ही वह अपने बडे भाई के दुश्मन को मौत के घाट उतार देता है।
ऎसा कोई काम नही जो बाबर अपनी बंदूक के दम पर नही करा सकता। सरकारी टेंडर हासिल करने के लिए सरकारी दफ्तर में खून की होली खेलने वाले बाबर के आतंक को खत्म करने के लिए दिल्ली से स्पेशल पुलिस ऑफिसर एस.पी. द्विवेदी (मिथुन चक्रवर्ती) को भेजा जाता है। अमनगंज पहुंचकर द्विवेदी सबसे पहले 12 साल से इलाके के थाने में जमे थानेदार चतुर्वेदी (ओमपुरी) और बाबर गैंग के नजदीकी रिश्तों का पर्दाफाश करता है। निर्देशक ने फिल्म में बाबर की हैवानियत को दिखाने की खातिर कई ऎसे दृश्यों को जोडा है, जिनसे बचा जा सकता था। मसलन, बाबर के दुश्मन तरबेज(सुशांत सिंह) का बाबर के खास आदमी को बूचडखाने में बडी ही हैवानियत से मारना।
यूपी के बॉर्डर में आतंक का दूसरा नाम बना भैया जी (गोविंद नामदेव) का करैक्टर फिल्म में फिट करना समझ से परे है। वैसे यूपी में राजनेताओं और गैंगस्टर्स की आपसी मिलीभगत की इस थीम पर असरदार फिल्म बनाई जा सकती थी, लेकिन बाबर में निर्देशक का फोकस कहानी की बजाय, भयंकर मारकाट पर ही रहा। पूरी मूवी में करीब ढाई सौ मर्डर और हर पल गोलियों की बौछार की आवाजों से दर्शक एक पल भी रिलैक्स नही हो पाता है। वैसे नए कलाकार सोहम अपने रोल में जमे है। बाबर के करैक्टर को उन्होंने अपनी दमदार ऎक्टिंग से जीवंत कर दिया है। ओम पुरी की ऎक्टिंग का तो कोई जवाब नही है। कुल मिलाकर बाबर जुर्म की दुनिया का दूसरा नाम है।

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