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भारत की अंतरिक्ष में नई उडान, एक साथ छोडे 7 उपग्रह

इस उपकरण से मानसून और तूफान का भी अंदाज लगाया जा सकेगा। बडी सफलता जानकारों का कहना है कि भारत अरबों डॉलर के अंतरिक्ष बाजार का एक अहम खिलाडी बनकर उभर रहा है। एक महीने पहले चंद्रयान मिशन के विफल हो जाने के बाद बुधवार को यह अभियान भारतीय वैज्ञानिकों के लिए एक बडी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। पिछले साल भारत ने एक ही अभियान में दस उपग्रहों का प्रक्षेपण किया था। इस बार अंतरिक्ष में रवाना किए गए छह विदेशी उपग्रहों में से चार जर्मनी और एक-एक स्विट्जरलैंड और तुर्की के हैं। यह सेटेलाइट यूरोपीय देशों, वहां के विश्वविद्यालयों के शिक्षा और प्रयोग के लिए इस्तेमाल में आने वाले हैं।
पीएसएलवी का यह 16वां अभियान है। पीएसएलवी की ऊंचाई सात मंजिला इमारत के बराबर है और इसका वजन 230 टन है। इसकी कीमत 160 करोड रूपए बताई गई है। भारत ने अपना अंतरिक्ष कार्यक्रम 1963 में शुरू किया था और उसके बाद से अपने बनाए हुए उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेज चुका है।




















