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भारत समाचार

वसुंधरा की तुरूप चाल से उलझा आलाकमान

नई दिल्ली 30,सितम्बर। इस्तीफा प्रकरण में अब वसुंधरा राजे के तुरूप ने भाजपा आलाकमान की सख्ती की हवा निकाल दी है। वसुंधरा ने स्वस्थ होने के बाद लालकृष्ण आडवाणी समेत सभी वरिष्ठ नेताओं से बातचीत कर अपनी स्थिति यह कहते हुए साफ कर दी कि उन्हें इस्तीफा देने में न कभी एतराज रहा और न ही अब है, लेकिन पार्टी पहले विकल्प तय कर ले। वसुंधरा के इस तुरूप के बाद आलाकमान खुद ही उलझ गया है, क्योंकि तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव अभियान की तेजी की वजह से 13 अक्टूबर तक संसदीय बोर्ड की बैठक बुलाना संभव नही हैं।
सूत्रों के अनुसार वक्त की नजाकत को समझते हुए भाजपा आलाकमान अब दीवाली के बाद ही वसुंधरा के विकल्प का एलान करेगा। दूसरी तरफ आलाकमान ने भी नरमी दिखाते हुए अब उनका इस्तीफा मांगे जाने के बजाए यह दलील देनी शुरू कर दी है कि वसुंधरा राजे की सेवा केन्द्र में ली जाएगी और इसी वजह से उन्हें नेता प्रतिपक्ष का पद छो़डने की सलाह दी गई है। सूत्रों के अनुसार स्वस्थ होने के बाद आला नेताओं से हुई बातचीत में वसुंधरा राजे ने कुछ अन्य बिंदुओं की ओर भी घ्यान आकृष्ट कराया है, जिसमें खास तौर से अघ्यक्ष के तौर पर अरूण चतुर्वेदी की नियुक्ति के वक्त औपचारिकता मात्र को भी उनसे न पूछा जाना और अब चतुर्वेदी की ओर से फूलचंद भिंडा को चुनाव अधिकारी व वासुदेव देवनानी को सदस्यता अभियान का संयोजक बनाने में कोई सलाह-मशविरा नहीं करना है। सूत्रों के मुताबिक राजस्थान भाजपा में सामुहिक फैसले न होने पर यह सवाल उठाया गया है कि इस तरह पार्टी की परंपरा से हटकर गुटबाजी को शह देना उचित नहीं है।

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