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भारत समाचार

कश्मीर में चीनी दखल से सरकार की खुली नींद

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर। गृह मंत्री पी चिदंबरम ने पैतरा बदल किया। पैतरा प्रणव मुखर्जी ने भी बदल लिया। अपना विदेश मंत्रालय भी बदला-बदला सा लगा। जब एसएम कृष्णा का रूख बदल गया तो विदेश मंत्रालय का राग बदलना ही था। अपन बात करे रहे है सीमाओं पर चीनी दखल और आतंकियों की घुसपैठ की। पहले बात चिदंबरम की। अपना आठ अक्टूबर का कॉलम याद करों। अपन ने लिया था कि पाकिस्तान को लेकर उलझन में अपने मंत्री। इसमें अपन ने 23 सितंबर वाला कॉलम भी याद कराया। जिसमें लिखा था कि हाफिज सईद की पीठ पर आईएम आई का हाथ। हाफिज को बचाकर रखेगी पाक सरकार। गिरफ्तार हुए, तो पोल खुलेगी आईएसआई की । तो आखिर क्या हुआ लाहौर हाईकोर्ट ने हाफिज के खिलाफ मुदकमें खारिज कर दिए। अब जब पाक सरकार सबूत नही देगी।
तो मुकदमें खारिज होंगे ही। जैसे सीबीआई क्वात्रोçच्चा के खिलाफ सबूत नहीं देगी।। तो बोफोर्स घोटाले का मुकदमों भी खारिज होगा ही। अपन बस रिकार्ड के लिए बता दें। बकौल सीबीआई के रिटायर्ड चीफ जोदिं्र सिंह सीबीआई के पास क्वात्रोçच्चा के खिलाफ सबूत मौजूद। खैर बात हो रही थी चिदंबरम की। पाकिस्तान से खबर आई थी साठ तालिबानों से सरेंडर करने की। तो अपनी खुफिया एजेसिंयों ने कहा ढाई सौ से तीन सौ जेहादी नियंत्रण रेखा पर मौजूद। घुसपैठ की फिराक में। तो अपने पी चिदंबरम बोले तालिबानों के घुसपैठ की खबर बेसिर पैर की। पर बुधवार को श्रीनगर पहुंचे तो सुर बदला हुआ दिखा। बोले लोकसभा चुनावों के बाद घुसपैठ बढी। पाक बेहद हताश। पाक और पीओके घुसपैठ कराने को बेताब।
इसे कहते है गंगा गए तो गंगाराम, यमुना गए तो यमुनाप्रसाद। अपने ने कल चीन पर बदले रूख की वजह चुनाव बताया था पर गिरगिट की तरह रंग बदलने वाले बयानों पर क्या कहे। यही चिदंबरम थे। जिन्होंने चीन की घुसपैठ पर कहा था कि मीडिया ने घुसपैठ को बढा-चढाकर बताया। यही बयान था एसएम कृष्णा का भी। पर अरूणाचल के चुनाव ने तेवर तीखे कर दिए शुक्र है है नींद खुली यूपीए सरकार की। बुधवार को चीन पर तेवर कुछ और तीखे हुए। दिल्ली में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्णु प्रकाश बोले। श्रीनगर से पी चिदंबरम। कोलकाता से प्रणव मुखर्जी। पहले बात विष्णु प्रकश की तो उन्होने कहा पाक के कब्जे वो कश्मीर से दखल बंद करें चीन। भारत को यह कतई कबूल नहीं। क्या हुआ है, जहा बता दे पाक ने जिस कश्मीर पर 1947 में नाजायज कब्जा किया। उसका आठ हजार वर्ग किलोमीटर चीन को दे किया। उसी पर बना है चीन का कराकोरम हाईवे।
अब जब मंगलवार को चीन अरूणाचल पर बोला तो पाक के पीएम यूसुफ रजा गिलानी बीजिंग मे ही थे। वहीं पर गिलानी हू जिंताओं में करार हुआ। करार है कराकोरम हाईवे हाईडल प्रोजक्ट लगगा। दोनों प्रोजेस्ट पीओके में। आप चीन की हरकतों पर निगाह डालिए। पहले अरूणाचल में एडीबी लोन में रूकावट बना फिर यूएन में हाफिज सईद के खिलाफ कोईवाही रोकी। फिर अरूणाचल, लद्दाख, उत्तराखंड में घुसपैठ की। फिर कश्मीरियों को भारतीय पासपोर्ट पर वीजा रोका। सादे कागज पर वीजा दिया। चीन की यह हरकत देखिए अपने कश्मीर को विवादास्पद बताना। पीओके को पाक का कानून का हिस्सा बताना। चला इस पर सही अपनी सरकार की नींद तो खुली। यो एसएम कृष्णा तो बुधवार को भी ऊघते रहे। पर प्रणव दा ने कोलकाता मे अरूणाचल को भारत का अभिन्न अंक बताया। तो चिदंबरम श्रीनगर में बोले हम चीनियों को बिजनेस वीजा देंगे। वह भी निहायत ट्रेंड चीनियों को। अनट्रेड तो भारत में भी बहुतेरे। पर बात ईट को जवाब पत्थर में देने की नहीं। पर बात चीन को संबंध बिगाडने के नतीजों का एहसास कराने की। चीन को यह बताना जरूरी। संबंधी बिगडे तो उसी का आर्थिक नुकसान ज्यादा होगा।

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