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चीन की रिश्तों में दरार पाटने की नई पहल

चीन इस पूरे इलाके में शांति और स्थिरता चाहता है। कल राजधानी में दोनों देशों के बीच हुए पर्यावरण सम्मेलन के अवसर पर चीन के भारत स्थित राजदूत झांज-जंग ने पत्रकारों के सवालों के जवाब देते हुए साफ किया कि दोनों देश आपसी सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे है। आम लोगों में किसी प्रकार की गलत फहमी नहीं फैलनी चाहिए।
मगर पर्यावरण के मुद्दे पर भारत व चीन में समझौता होने का सीधा अर्थ यह माना जा रहा है कि चीन व भारत का दृष्टिकोण इस मामले में समान है और दोनों ही देश विकासशील देशों हितों की रक्षा के लिए कोपेनहेगन में होने वाले अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन में एक सम्मान नीति अपनाएंगे। भारत भी चीन के साथ किसी भी प्रकार का तनाव मोल नही लेना चाहता है क्योंकि वह उसका सबसे अन्तर्राष्ट्रीय प़डोसी है लेकिन सीमा विवाद के मुद्दे पर दोनों ही देशों में अभी तक सर्वसम्मति नहीं बन पाने से दोनों को ही अपने-अपने राष्ट्रवादी तत्वों को संतुष्ट करना प़ड रहा है। मगर कश्मीर पर चीन ने अपना पुरान मत दोहरा कर साफ कर दिया है कि वह इस मुद्दे पर पाकिस्तान के रूख से इत्तेफाक नहीं रखता है। हालांकि चीन ने यह भी साफ कर दिया है कि वह पाक अधिकृत कश्मीर में जो भी परियोजनाएं चला रहा है उनसे पीछे नहीं हटेगा मगर वह इस इलाके को विवादित क्षेत्र स्वीकार करता है।




















