भारत समाचार
जी-20 सम्मलेन बिना भेदभाव हर देश में हो

बैठक के दौरान वे इस बात पर भी एकमत थे कि आतंकवादी हमले करनेवालों को कानून के दायरे में लाना और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा प्रतिबंधित व्यक्तियों या संस्थाओं के मामले में ऎसे प्रतिबंधों का पालन तय करवाना भी अहम जिम्मेदारी है। बैठक के बाद एक साझा घोेषणापत्र भी जारी किया गया जिसमें रूस, भारत और चीन के विदेश मंत्री इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता के विभिन्न मुद्दों पर बातचीत के लिए सहमत हो गए हैं। आपसी सहयोग बढ़ाने और रिश्त मजबूत करने की बात भी कही गई है। बैठक में कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए नवंबर-दिसंबर-2009 में विशेष समिति की बैठक दिल्ली में आयोजित करने पर सहमति हुई है।
आतंकवाद की निंदा
बैठक में हर प्रकार के आतंकवाद की निंदा करते हुए संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों से आग्रह किया गया कि अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक नीति को तुरंत अपनाया जाए। ईरान के मुद्दे पर मंत्रियों का कहना था कि शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने के पूरे प्रयास किए जाने चाहिए।तीनों देशों ने अपनी अंतरराष्ट्रीय भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा है कि भारत, चीन और रूस दुनिया के 20 प्रतिशत भूमि पर रहते हैं जबकि दुनिया की 39 प्रतिशत आबादी यहां बसी हुई है।
इस त्रिपक्षीय बैठक में हिस्सा लेने के लिए चीन के विदेश मंत्री यांग जेईची और रूस के विदेश मंत्री सेर्गई लावरोव अपने वरिष्ठ अधिकारियों के दलों के साथ बेंगलुरू पहुंचे थे। इससे पहले तीनों देशों के विदेश मंत्रियों की ऎसी नौ बैठकें हो चुकी हैं, मगर बदलते हुए परिप्रेक्ष्य में, जब विश्व पर आर्थिक संकट का ग्रहण लगा हुआ है और आतंकवाद की समस्या जटिल होती जा रही है, इस बैठक का ज्यादा महत्व बढ़ गया है।
बताया जा रहा है कि बैठक के बाद भारत और चीन के विदेश मंत्री अलग से भी मुलाकात करेंगे। यह दोतरफा मुलाकात इसलिए भी अहम है, क्योंकि हाल के दिनों में भारत और चीन के संबंधों में क़डवाहट बढ़ी है। चीन ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अरूणाचल प्रदेश यात्रा पर आपत्ति जताकर यह संकेत देने की कोशिश की थी कि वह इस भारतीय प्रदेश पर अब भी अपना दावा रखना चाहता है। इसके अलावा चीन ने तिब्बत के धार्मिक नेता दलाई लामा के अरूणाचल प्रदेश के प्रस्तावित दौरे पर भी आपत्ति जताई है। भारत ने इन दोनों ही आपत्तियों को रद्द कर दिया है और अरूणाचल प्रदेश को अपना अभिन्न अंग बताया है, साथ ही दलाई लामा को भी अरूणाचल प्रदेश जाने की अनुमति दे दी है। इस दि्वपक्षीय भेंट में इन सभी विवादों का साया रहेगा। भारतके विदेश मंत्री एसएम कृष्णा इस बैठक को लेकर काफी आशान्वित हैं। उन्होंने कहा है कि भारत और चीन के संबंध उत्तररोत्तर बेहतर हो रहे हैं और आपसी सहयोग बढ़ रहा है। दोनों ही महत्वपूर्ण देश हैं इसलिए उन्हें बहुत ही फूंक-फूंककर कदम रखने की जरूरत है।




















