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लाभ वाले सरकारी उद्योग अपने 10 प्रतिशत शेयर जनता को बेचेंगे

इन नियमों के तहत सूचीबद्ध कंपनियों को न्यूनतम 10 प्रतिशत हिस्सा-पूंजी सार्वजनिक रूप से बेचनी प़डती है। केवल उन्हीं उपक्रमों को सूचीबद्ध किया जाएगा जिनमें गत तीन वर्षो में लगातार शुद्ध लाभ हुआ हो, बशर्ते उनकी नेट वर्थ सकरात्मक हो और संचित घाटा नहीं हो। यह निर्णय लेने वाली आर्थिक मामलात की मंत्रिमंडलीय समिति ने जुलाई में वित्त मंत्री द्वारा बजट में की गई घोषणा को पूरा करते हुए कि सार्वजनिक उपक्रमों में जनभागीदारी को बढ़ाया जाएगा, इन उपक्रमों के शेयरों की बिक्री से मिलने वाली राशि के उपयोग के लिए नियम बदल दिए।
अब नीति थी बिक्री की राशि को नेशनल इन्वेस्टमेंट फंड (एआईएफ) में निवेशित करना और केवल इसके लाभांश का उपयोग सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए करना। गृहमंत्री पी. चिदम्बरम ने कहा सरकार वापिस 1012 से केवल लाभाश का उपयोग करेगी। चिदम्बरम ने कहा, "तंग वित्तीय स्थिति और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों में धन की आवश्यकता को देखते हुए विशेष प्रावधान किया जा रहा है तीन वर्ष के लिए (2009 से 2012 तक) उन्होंने कहा कि विनिवेश से प्राप्त राशि एन आई एफ के माध्यम से जाने की बजाय सीधे सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों पर पूंजीगत व्यय के लिए जाएगी। इस कदम से सरकार को अपना वित्तीय घाटा कम करने में मदद मिलेगी जो इस वित्तीय वर्ष में मार्च तक बढ़कर जीडीपी का 6.8 प्रतिशत होने जा रहा है। गत वर्ष यह 6.2 प्रतिशत था।




















