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भारत समाचार

हेमंत करकरे का बुलेटप्रूफ जैकेट लापता

मुंबई। पिछले साल वर्ष मुंबई में हुए आतंकवादी हमलों के दौरान शहीद हुए आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीसी) के प्रमुख हेमंत करकरे की पत्नी ने आरोप लगाया है कि उस वक्त उनके पति ने जो बुलेटप्रूफ जैकेट पहना था, वह गायब है। करकरे की पत्नी के इस आरोप से इस तरह की प्रामाणिक सामग्री के संरक्षण पर गंभीर सवालिया निशान लग गया है। कविता करकरे ने एक इंटरव्यू में बताया जब उनका (करकरे) शव पाया गया तब बुलेटप्रूफ जैकेट नहीं था, जहां तक महीने पहले सूचना के अधिकार कानून के तहत आवेदन कर यह पूछा था कि वह जैकेट कहां है, इसके जवाब में मुझे बताया गया कि वह गायब है। कामा अस्पताल के करीब घात लगाकर किए गए एक हमले में 1982 बैच के आईपीएस अधिकारी करकरे, एक अन्य आईपीएस अधिकारी अशोक काम्टे और मुठभेड विशेषज्ञ विजय सालस्कर की मौत हो गई थी। इस घटना के दौरान करकरे ने बुलेट प्रूफ जैकेट पहनी रखी थी, लेकिन इसके बावजूद उनके सीने में गालियों के तीन गंभीर घाव थे, जो इस तरह के आतंकवादी हमलों के मद्देनजर इन बुलेटप्रूफ जैकेटो की क्षमता पर सवालिया निशान लगाते है।
कवित ने पत्रकारों को बताया कि टीवी चैनलों के वीडियों में यह साफ-साफ पता चलता है कि हेमंत ने सीएसटी में एक जैकेट पहना हुआ था और वे वाहन में सवार होकर यहां से गए। इसलिए वह जैकेट कहां गईक् मुझे यह नही मालूम कि क्या किसी ने इसके बाद उनसे यह ले लिया या बाद में यह उनके शव से निकाल लिया गया। लेकिन वह (जैकेट) गायब है। मुंबई पुलिस की और से आतंकवादी हमले का सामना करने का जो तरीका अपनाया गया, उस पर भी कविता ने सवाल उठाया है।
उन्होंने कहा- मैं इस बात को लेकर आश्यर्चकित हंू कि वाहन में सवार मेरे पति ओर अन्य अधिकारियों के लिए क्यों नहीं मदद भेजी गई। हेमंत नेे मदद की मांग की थी और उन्होंने इसके लिए 40 मिनट तक इंतजार भी किया, लेकिन किसी को भी नहीं भेजा गया। कविता ने भावुक होते हुए कहा-उनके पति ऎसे व्यक्ति नहीं थे, जो वातानुकूलित केबिन में बैठने और अपने मातहत अधिकारियों को निर्देश देने कार्य को तव”ाों देते हो। इसके बजाए वे घटनास्थल पर जाने को वरीयता देते थे।
उन्होंने कहा- हेमंत की मांग के बाद अगर जल्द से जल्द मदद भेजी जाती तो काम लेन में ही कसाब और अन्य आंतकवादियों को धर दबोचा जा सकता था। करकरे को ठाणे, वाशी और पनवेल में हुए श्रृंखलाबद्ध बम विस्फोटों के मामले को सुलझाने का श्रेय दिया गया था। साथ ही, मालेगांव में 29 कट्टरपंथी भगवा संगठन के शामिल होने की बात का खुलासा भी उनकी ही जांच से हुआ था।

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