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पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर गफूर से मांगा स्पष्टीकरण

गफूर के इस बयान से न सिर्फ मुंबई पुलिस की साख पर बट्टा लगा है बल्कि महाराष्ट्र सरकार की छवि भी खराब हुई है। बयान के सार्वजनिक होते ही महाराष्ट्र सरकार हरकत में आ गई है। पहले मुख्यमंत्री और फिर महाराष्ट्र के गृहमंत्री ने हसन गफूर के इस बयान को गंभीरता से लिया है। आरआर पाटिल ने गफूर से इस बयान पर सफाई भी मांग ली है। गफूर से पूछा गया है कि सरकारी पद पर रहते हुए उन्होंने इस तरह का बयान क्यों दियाक् बयान का आधार क्या है् अगर उनके बयान में जरा भी सच्चाई है तो इसे सरकार के सामने उठाने की बजाय मीडिया में बयानबाजी क्यों की गईक् उधर, मामले को तूल पक़डते देख गफूर ने यह कहकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की कि उनके बयान को तो़ड-मरो़ड कर पेश किया गया है।
हालांकि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने पहले ही गफूर के बयान की जांच करने के आदेश दे दिए थे। महाराष्ट्र सरकार के गृह विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव चंद्रा आयंगर गफूर के बयानों की जांच कर रही हैं। उल्लेखनीय है कि गफूर ने एक पत्रिका को दिए इंटरव्यू के दौरान अपने मातहतों पर कुछ गंभीर आरोप लगाए थे। उनके मुताबिक, जैसा मैंने आपसे कहा कि ऎसे कुछ अफसर थे, जैसे के एल. प्रसाद कहने के बावजूद ट्राइडेंट नहीं पहुंचे, देवेन भारती, के. वेंकटेशम और परमवीर सिंह ने भी मौके की नजाकत को नहीं समझा।




















