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ईरान और पश्चिमी देशों में बढ़ी तनातनी

तेहरान। ईरान के दस नए यूरेनियम संवर्धन संयंत्र लगाने की घोषणा के बाद पश्चिम देशों में गरमाहट बढ़ गई है और उन्होंने ईरान के इस फैसले की निंदा की है। दूसरी और ईरानी संसद ने राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद से कहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) से सहयोग कम कर दे।
ईरान सरकार ने देश में यूरेनियम संवर्धन के दस नए संयंत्र लगाने की योजना को मंजूरी दे दी है। ईरान के सरकारी मडिया के मुताबिक नए संयंत्रों में से पांच के निर्माण पर काम तुरंत शुरू हो जाएगा जबकि पांच अन्य के लिए दो महीने के भीतर जगह ढूंढ़ ली जाएगी। नए संयंत्र नतान्ज के मौजूदा संयंत्र के बराबर आकार के होंगे। ईरान की इस घोषणा पर अमरीका और ब्रिटेन ने क़डी प्रतिक्रिया दी है। अमरीका का कहना है कि ईरान अपनी वचनबद्धता का उल्लंघन कर रहा है जबकि ब्रिटेन ने ईरान के फैसले पर गहरी चिंता जताई है। अमरीका का कहना है कि ईरान खुद ही अपने को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग कर रहा है। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता रॉबर्ट गिब्स ने कहा कि परमाणु कार्यक्रम पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता का जवाब देने के लिए ईरान के पास अब कम समय रह गया है। दूसरी ओर ब्रिटेन का कहना है कि और यूरेनियम संवर्धन संयंत्र बनाने का फैसला संयुक्त राष्ट्र सुंरक्षा परिषद के प्रस्ताव का जान-बूझकर किया गया उल्लंघन है।
उसने कहा, ईरान के फैसले पर वह अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी और अन्य सहयोगी देशों के साथ मिलकर कदम उठाएगा। जर्मनी ने भी ईरान की घोषणा पर चिंता जताई है। दूसरी ओर ईरान का कहना है कि वह परमाणु अप्रसार संधि के तहत मिले अधिकारों का ही इस्तेमाल कर रहा है। इससे पहले ईरानी संसद ने राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद से कहा है कि वे अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) से सहयोग कम कर दे। संसद ने परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान पर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के मद्दनजर यह कदम उठाया है।
अभी शुक्रवार को ही आईएईए ने परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान के खिलाफ एक निंदा प्रस्ताव पारित किया था। इस बारे में ईरानी संसद के स्पीकर अली लारीजानी ने कहा, आईएईए का प्रस्ताव यही साबित करता है कि पश्चिमी शक्तियों की रूचि मामले का समाधान ढूंढ़ने में नहीं बल्कि एक किस्म की राजनीतिक जालसाजी को आगे बढ़ाने में है, वरना वे फोर्दो यूरेनियम संवर्धन केंद्र शुरू करने की हमारी घोषणा का स्वागत करते। उसे हमारे खिलाफ प्रस्ताव पारित करने का आधार नहीं बनाते। उल्लेखनीय है कि पश्चिमी देश आरोप लगाते आ रहे हैं कि ईरान परमाणु हथियार विकसित करने में जुटा है, जबकि ईरान बार-बार दोहरात रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कार्यो के लिए है।

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