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भारत समाचार

गुवाहाटी जेल बनी उल्फा नेताओं का मंत्रणा केंद्र

गुवाहाटी। गुवाहाटी की सेंट्रल जेल प्रतिबंधित संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) के नेताओं के लिए मंत्रणा केंद्र बन गया है। इस जेल के एक ही सेल में रखे गए इन प्रमुख नेताओं में शांति प्रक्रिया के संदर्भ में गहन विचार चल रहा है। उल्फा के उपाध्यक्ष प्रदीप गोगोई, स्वयंभू विदेश सचिव साशा चौधरी, स्वयंभू वित्त सचिव चित्रबन हजारिका और इस संगठन के प्रचार विभाग प्रमुख मिथिगा दैमरी दो दिनों से बैठकों में मशगूल हैं।
गोगोई और दैमेरी पहले से इस जेल में बंद हैं जबकि चौधरी और हजारिका को बांग्लादेश प्रशासन ने पिछले माह भारत के हवाले किया था। ये दोनों बीते सोमवार एक स्थानीय अदालत के न्यायिक हिरासत के आदेश के बाद इस जेल में आए हैं। चौधरी और हजारिका के वकील बिजोन का कहना है कि जांच एजेंसियां सोमवार को दोनों के लिए 30 और दिनों की पुलिस हिरासत मांग सकती थी, मगर उन्होंने इसके लिए कोई दबाव नहीं डाला।
इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार इन दोनों को जेल में बंद अपने साथियों से मिलानी चाहती है। उन्होंने कहा, यह सकारात्मक कदम है, इससे चारों उल्फा नेता शांतिवार्ता पर अपनी राय बांट रहे हैं। मेरा कहना है कि यह एक अच्छी शुरूआत है, उन्हें जेल में रहने देने की सरकार की अच्छी रणनीति है। जेल अधिकारियों का कहना है कि चारों उल्फा नेताओं को एक ही सेल में रखा गया है ताकि वे राज्य में शांति के बारे में विचारों का आदान-प्रदान कर सकें। सुरक्षा और कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार जल्द ही उल्फा अध्यक्ष अरबिंदा राजखोवा से भी पूछताछ खत्म करना चाहेगी। इसके बाद उल्फा के मुख्य कमांडर परेश बरूआ को अलग रखते हुए शांतिवार्ता शुरू करने की प्रक्रिया शुरू करेगी।

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