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भारत समाचार

महंगा हो सकता है कर्ज

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष सी रंगराजन ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक मुद्रास्फीति पर नियंत्रण के लिए मुद्रा की आपूर्ति घटा सकता है और ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। इससे सभी प्रकार का कर्ज महंगा हो जाएगा।
उन्होंने कहा, यदि दिसम्बर में कीमतों में गिरावट नहीं होती है तो शुरूआती कदम उठाए जा सकते है। आरबीआई ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता और सीआरआर बढ़ा कर तरलता में कमी लाने को तरजीह दे सकता है।
रंगराजन इस प्रश्न का जवाब दे रहे थे कि खाद्य मुद्रास्फीति के 10 साल से उच्चातम स्तर पर पहुंच जाने के बीच आरबीआई को क्या कदम उठाना चाहिए। मुद्रा आपूर्ति में कमी का समर्थन करते हुए रिजर्व बैंक के पूर्व गर्वनर रंगराजन ने कहा कि केन्द्रयी बैंक नकद आरक्षी अनुपात (सीआरआर) में बढ़ोतरी कर सकता है। बैंक को अपने पास जमा राशि का जो हिस्सा आरबीआई के पास रखना होता है उसे सीआरआर कहते है। आरबीआई ने पिछले साल सितम्बर से शुरू हुए वैश्विक वित्तीय संकट के असर से निपटने के संबंध में नकदी से जूझ रहे उद्योग को मदद करने के लिए सीआरआर में कमी कर बैंकों के पास ऋण देने योग्य धन का प्रवाह बढ़ाया था।
आरबीआई के गवर्नर डी सुब्बाराव ने 18 दिसम्बर को वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी से मुलाकात की जिससे मुद्रा नीति में सख्ती की अटकलों को हवा मिली है। केन्द्रीय बैंक 29 जनवरी को मौद्रिक नीति की समीक्षा पेश करने वाला है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता वाले सत्तारूढ़ गठबंधन पर कीमतों पर लगाम लगाने के लिए राजनीतिक दबाव बढ़ता जा रहा है। विपक्षी दलों ने सरकार पर कीमतों पर लगाम लगाने में असमर्थ रहने का आरोप लगाया और इस संबंध में संसद की कार्यवाही रोकी।
संसदीय समिति ने पिछले सप्ताह मुद्रास्फीति पर लगाम लगाने में नाकाम रहने के लिए सरकार की खिंचाई की। आरबीआई के पूर्व गवर्नर जालान ने कहा कि केन्द्रीय को नकदी वापस लेना चाहिए ताकि महंगाई पर नियंत्रण लगाने में मदद मिले।

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