शिकागो। हिंदी सिनेमा के महान अभिनेताओं में से एक रहे अशोक कुमार की जन्मशती पर भारत और विदेशों में प्रदर्शनियों, फिल्म प्रदर्शनों, नाट्य मंचन, वृत्तचित्र प्रदर्शन और उनकी जावनी प्रस्तुत करने के कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है। इस साल अक्टूबर में ये समारोह शुरू हो जाएंगे।
अशोक कुमार की 100वीं वर्षगांठ के अवसर पर सालभर बाद 13 अक्टूबर, 2011 को इन कार्यक्रमों का समापन होगा। अशोक कुमार की बेटी भारती जाफरी कहती हैं, ""भविष्य की पीढि़यों के लिए मेरे पिता के काम का दस्तावेजीकरण जरूरी है।"" भारती ने अपने पिता की याद में "अशोक कुमार फाउंडेशन" की स्थापना की है। वह कहती हैं कि एक नाटक और एक फिल्म का विचार बहुत अच्छा है क्योंकि अशोक कुमार का जीवन बहुत नाटकीय रहा है। उन्होंने कहा, ""यकीनन पटकथा बहुत महत्वपूर्ण है क्योकि मेरे पिता संवादों के आधिक्य के खिलाफ थे।"" समारोहों के तहत शिकागो में कार्यरत पत्रकार अशोक ईस्वरन द्वारा लिखी गई अशोक कुमार की नई जीवनी पेश की जाएगी। फिल्म "जीवन नैया" (1936) से अभिनय की शुरूआत करने वाले "दादामुनी" मतलब ब़डे भाई के नाम से मशहूर अशोक कुमार एक बेहतरीन चित्रकार, शतरंज खिल़ाडी, एक होम्योपैथ व कई भाषाओं के ज्ञाता भी थे। कुमुदलाल कुंजीलाल गांगुली के घर जन्मे अशोक कुमार ने 300 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया था।





















