लखनऊ। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सन लॉ बोर्ड के अयोध्या विवाद को सुप्रीम ले जाने की घोषमा के एक दिन बाद ही अब हिंदू दावेदारों में से प्रमुख निर्मोही अख़ाडा ने भी याचिका दायर करने का दावा किया है। उसने कहा है कि कोर्ट से बाहर समझौता की कोई संभावना है। अख़ाडा प्रवक्ता महंत रामदास ने कहा कि हम नहीं चाहते, लेकिन अब हमें भी सुप्रीम कोर्ट जाना प़डेगा, क्योंकि सुन्नी सेंट्रल मुस्लिम वक्फ बोर्ड के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के प्रस्ताव का औपचारिक रूप से मुस्लिम पसर्नल लॉ बोर्ड ने समर्थन कर दिया है।
अख़ाडा प्रमुख 89 वर्षीय महंत भास्कर दास की ओर से बातचीत करते हुए रामदास ने कहा, हम यह समझा पाए हैं कि मुसलमानों में एक खास तबका नहीं चाहता कि अयोध्या अध्याय खत्म हो और ऎसा ही हुआ। इन हालात के मद्देनजर हमें भी उन्हीं के रास्ते आगे बढ़ने को मजबूर होना प़ड रहा है और सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल करनी प़डेगी। जब यह पूछा गया कि इस विवाद में प्रथम मुस्लिम वादी नब्बे वर्षीय हासिम अंसारी के उनके प्रयासों को क्या होगा जो उन्होंने कोर्ट के बाहर बातचीत से विवाद को सुलझाने के लिए शुरू किए थे, तो रामदास ने कहा, वह ठीक है, हम अंसारी के प्रयासों को सराहना करते हैं, जिनका महंत भास्कर दास ने सकारात्मक जवाब दिया था, लेकिन अब क्या करें। अपनी मजबूत स्थिति का संकेत देते हुए उन्होंने कहा, हमारे पास यह विश्वास करने का कारण है कि विवादित पूरी भूमि के हम एकमात्र अधिकारी है और हमें पूजा और प्रस्तावित मंदिर पर पूर्ण अधिकार मिलना चाहिए।
निर्मोही अख़ाडा के में परिवर्तन के संबंध में पूछे जाने पर अखिल भारतीय अख़ाडा परिषद प्रमुख ज्ञानदास ने इसके लिए भारतीय जनता पार्टी के उपाध्यक्ष विनय कटियार को जिम्मेदार ठहराया। इसमें एकमात्र विनय कटियार हैं जिनके कारण निर्मोही अख़ाडा ने अपना कदम बदल लिया। यह सामने आया है कि कटियार ने महंत भास्कर दास के दिमाग में जहर भर दिया। इस मामले के समाधान की प्रक्रिया से राजनीतिज्ञों को दूर रखने के प्रमुख हिमायती रहे ज्ञानदास ने इसके लिए कटियार और निर्हित स्वार्थो को दोषी ठहराया है।
भारत समाचार
निर्मोही अख़ाडा भी जाएगा सर्वोच्च अदालत





















