पटना। बिहार विधानसभा के आगामी चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस की ओर से जारी उम्मीदवारों की पहली सूची को लेकर बिहार कांग्रेस में बगावत के सुर उभरने लगे हैं। अपने जीजा लालू प्रसाद का साथ छो़ड कांग्रेस का हाथ थामने वाले पूर्व सांसद साधु यादव ने अब अपने समर्थकों को टिकट न मिलने पर बगावत कर दी है तो टिकट मिलने के बावजूद लवली आनंद ने भी बगावती तेवर अख्तियार कर लिए हैं।
विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की ओर से जारी की गई उम्मीदवारों की पहली सूची में अपने समर्थकों की अनदेखी किए जाने से साधु नाराज हैं। साधु ने राज्य में कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के उपाध्यक्ष पद से त्यागपत्र दे दिया है। साधु ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं पर टिकट बंटवारे में धांधली का आरोप लगाया है। उन्होंने पटना में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि कांग्रेस में जो लोग टिकट बांटने का कार्य कर रहे हैं, वे ऎसे लोगों को टिकट दे रहे हैं जिनका हारना तय है। उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरे दल के सांसदों द्वारा भेजे गये नामों पर विचार किया जा रहा है जबकि अच्छे और कर्मठ कार्यकर्ताओं को तरजीह नहीं दी जा रही है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के पूर्व सांसद ने कांग्रेस छो़डने की किसी संभावना से इंकार करते हुए कहा कि वह पार्टी के सच्चो सिपाही हैं और आगे भी पार्टी हित में काम करते रहेंगे। साधु यादव ने इतना जरूर कहा कि अगर पार्टी नहीं चेती तो वह कोई भी कदम उठा सकते हैं। वह पिछले लोकसभा चुनाव से पहले राजद छो़डकर कांग्रेस में शामिल हुए थे। दूसरी ओर हत्या के मामले में बीते तीन वर्षो से जेल में बंद पूर्व सांसद आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद भी अपने समर्थकों को टिकट न दिए जाने से नाराज हैं। कांग्रेस ने लवली को मधेपुरा के आलमनगर सीट से उम्मीदवार बनाया है। सहरसा में लवली आनंद के एक निकटवर्ती नेता ने बताया कि कांग्रेस में टिकट बंटवारे में जमीन से जुडे़ नेताओं की अनदेखी की गई है। उन्होंने कहा कि लवली आनंद को टिकट अवश्य मिल गया है परंतु पहले से तय कार्यक्रम के अनुसार वह बुधवार को अपना नामांकन नहीं दाखिल करेंगी। गौरतलब है कि कांग्रेस ने सोमवार देर रात 77 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी। करीब 20 वर्षो के बाद राज्य में कांग्रेस विधानसभा की सभी 243 सीटों पर चुनाव ल़डने की घोषणा की है।





















