लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राम जन्मभूमि मंदिर जैसे आस्था के विषय को सत्ता प्राप्ति की विषय बनाकर उसके साथ धोखा और व्यभिचार किया है, इससे राम मंदिर आंदोलन को ब़डा भारी नुकसान पहुंचा।
यह आरोप विश्व हिंदू परिषद (बिहिप) अध्यक्ष अशोक सिंघल ने एक न्यूज चैनल से विशेष बातचीत के दौरान लगाया है। इहालाबाद हाईकोर्ट के फैसले में विवादित स्थल को राम जन्मस्थान मान लेने के बाद अशोक çंसघल फिर से राम मंदिर आंदोलन ख़डा करने के प्रयासों में जुटे हैं। विहिप इस मुद्दे पर कांग्रेस से भी नाराज है, लेकिन उसकी कोशिश है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलकर इस मामले पर संसद से कानून बनाने की मांग दोबारा उठाई जाए। इस बीच विहिप के एक प्रमुख कार्यकर्ता त्रिलोकीनाथ पांडेय रामलला विराजमान के मित्र के तौर पर सुप्रीम कोर्ट में अपील भी कर रहे हैं। कानून में देव प्रतिमा नाबालिग मानी जाती है इसलिए उसकी ओर से मित्र की हैसियत से अदालत में पैरवी की जाती है।
इलाहाबाद कोर्ट ने अपने फैसले में विवादित स्थल पर तीन पक्षों रामलला विराजमान, निमोüही अख़ाडा और सुन्नी वक्फ बोर्ड का कब्जा मानते हुए तीनों को जमीन देने का आदेश दिया है, लेकिन विहिप का कहना है कि उसे यह विभाजन स्वीकार नहीं है। विहिप की संत उच्चााधिकार समिति ने अयोध्या में हुई अपनी बैठक में केंद्र के कब्जे वाली पूरी 70 एक़ड जमीन राम मंदिर बनाने के लिए मांगी है और साथ ही यह भी कहा गया है कि बाबरी मस्जिद अयोध्या की सांस्कृतिक सीमा के बाहर बन सकती है।
अशोक सिंघल का कहना है- वह समस्त भूमि भगवान राम की क्री़डा भूमि है, वहां उनके कुल संस्कार हुए इसलिए उस पूरे परिसर में राम मंदिर ही बनेगा। एक तिहाई भूमि रामानंदी वैष्णव संप्रदाय के निर्मोही अख़ाडा को देने के सवाल पर सिंघल का कहना है कि जन्म स्थान पर मालिकाना हक केवल रामलला का है। उन्होंने कहा कि विहिप निर्मोही अख़ाडा से बात करेगी और मंदिर के प्रबंध में उनका भी सहयोग लेगी, लेकिन जहां तक मंदिर बनाने का काम है, वह काम राम जन्मभूमि न्यास ही करेगा। एक विराट मंदिर बनाने की बात करते हुए उन्होंने कहा कि न्यास पत्थर निर्माण के काम में लगा है, तो निर्मोही अख़ाडा को पुजारी प्रशिक्षित करने के काम में लग जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में जाने और प्रधानमंत्री से मिलने जैसे विहिप के विरोधाभासी बयानों के सवाल पर सिंघल ने कहा, हमने तो कहा है कि दरवाजे खुले हैं।
अगर कोई रास्ता खुलता है तो कोशिश की जाए और इसीलिए प्रधानमंत्री से मिलने जा रहे हैं। सिंघल का कहना है कि मुसलमानों के लिए तो यह एक सामान्य मस्जिद है जबकि हमारे लिए यह आस्था का विषय है, इसलिए मुसलमानों को भी सोचना चाहिए कि अगर आप भावनाओं का आदर नहीं करेंगे तो संबंध कैसे मधुर होंगे। हम चाहते हैं कि वे सरयू के उस पार किसी उचित स्तान पर मस्जिद बना लें। उनको तो एक मस्जिद ही बनानी है, कहीं बना लें। यह पूछने पर कि कांग्रेस के कुछ लोगों ने अदालत के निर्णय का स्वागत किया है, जिससे समझा जा रहा है कि वे मंदिर मस्जिद अगल-बगल में बनाने के पक्षधर हैं, सिंघल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस झग़डा कराना चाहती है। उनका कहना था कि कौन ऎसा सांसद होगा जो राम मंदिर निर्माण नहीं चाहेगा।
उनका दावा है कि पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंहा राव के मन में एक भव्य मंदिर की कल्पना थी। जब उनसे पूछा गया कि फिर आपके समर्थन से बनी भाजपा सरकार में मंदिर के लिए जमीन क्यों नहीं मिल पाई, तो सिंघल ने कहा, उन लोगों ने कोई प्रयत्न ही नहीं किया लोगों में आम सहमति बनाने का। वे भागते रहे इस मुद्दे से। प्रयास किया होता तो मेरा मानना है कि मंदिर बन गया होता।
जब उनसे कहा गया कि उन्होंने (भाजपा) ने इसका पूरा फायदा उठाया, तो वह भाजपा के प्रति और कटु हो गए और कहा, देखिए, यह उन्होंने ब़डा भारी शोषण किया। उन्होंने आस्था के विषय को सत्ता प्राप्ति का विषय बनाया। मैं मानता हूं, यह एक प्रकार से व्यभिचार है। अगर उन्होंने आस्था का विषय उठाया था तो आस्था के नाते उनको इसके प्रति समर्पित हो जाना चाहिए था।
फिर अतीत की घटनाओं को याद करते हुए सिंघल ने कहा, असल में राम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन को शुरू तो कांग्रेस ने किया था। दयाल खन्ना और उन जैसे कुछ दूसरे लोगों ने बाद में हम लोगों ने इसकी जिम्मेदारी ले ली। बाद में आडवाणीजी ने इसे एकपक्षीय बना दिया, अपनी रथयात्रा निकालकर।
उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में आने के बाद आडवाणी ने उसे भुला दिया, क्योंकि उन्हें राज करना था। उन्होंने सीधे-सीधे इसका राजनीतिक लाभ उठाया।
भारत समाचार
भाजपा ने राम मंदिर मुद्दे से किया व्यभिचार : सिंघल





















