नई दिल्ली। इस वर्ष मार्च में मेजर ध्यान चन्द नेशनल स्टेडियम में खेले गए एफआईएच विश्वकप में टीम की नाकामी के बावजूद राष्ट्रीय खेल हॉकी 19वें राष्ट्रमंडल खेलों में दर्शकों का सबसे चहेता खेल बना हुआ है। नेशनल स्टेडियम में खेले जा रहे सभी मैचों में काफी संख्या में दर्शक पहुंच रहे हैं। खासतौर पर भारत की महिला टीम का मुकाबला देखने के लिए दर्शकों के बीच खास उत्सुकता देखी जा रही है।
भारत और पाकिस्तान की टीमों के बीच 10 अक्टूबर को होने वाले मुकाबले की सभी टिकटें 20 दिन पहले ही बिक चुकी हैं। यही हाल भारत बनाम आस्टे्रलिया मुकाबले का रहा। भारत-आस्टे्रलिया भि़डंत से पहले नेशनल स्टेडियम में गुरूवार को इंग्लैंड और कनाडा का मैच खेला गया। इस मैच के लिए भी भारी संख्या में दर्शक पहुंचे। विश्व कप की तरह इन दर्शकों को एक सुविधा मिली है कि वे एक टिकट पर दिन के सभी मैच देख सकते हैं। ऎसे में दर्शक भारत के मैचों के पल-पल के रोमांच का मजा लेने के लिए काफी पहले ही स्टेडियम में पहुंच जाते हैं और उस समय खेल रही दूसरी टीमों का भी जमकर हौसलाअफजाई करते हैं। भारत-आस्ट्रेलिया मैच देखने के लिए पहुंचे दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र विपुल और उनके चार साथियों ने बताया कि क्रिकेट के बाद आज भी हॉकी ही उनके लिए सबसे लोकप्रिय खेल है। विपुल ने कहा, ""हमारे लिए हॉकी काफी मायने रखती है। आखिरकार इस खेल ने हमें ओलम्पिक में ख्याति दिलाई है। जिस स्टेडियम में इसके मैच खेले जा रहे हैं, वह एक ऎसे महान खिल़ाडी के नाम पर रखा गया है, जो इस खेल का जादूगर कहलाता था। ऎसे खेल आयोजन स्थल पर आकर अच्छा लगता है।"" युवा तो युवा हॉकी का जुनून बुर्जुगों पर भी हावी है। 67 वर्षीय दिलदार सिंह सीधे रोहतक से हॉकी मुकाबला देखने पहुंचे। दिलदार सिंह का कहना है कि वह खुद एक हॉकी खिल़ाडी रहे हैं और दिल्ली पुलिस में काम करने वाले अपने बेटे को कहकर उन्होंने भारत के हॉकी मैचों के सभी टिकट खरीदे हैं। दिलदार सिंह ने कहा, ""हमारे प्रदेश के बच्चे कुश्ती में बहुत अच्छा कर रहे हैं। हॉकी हमारा अपना खेल है। मैं खुद हॉकी खिल़ाडी रहा हूं। हमारे शाहाबाद मरकंडा की ल़डकियां महिला टीम की शान हैं। मैं तो हॉकी नहीं छो़डता। नौकरी करता था, तब भी मैच नहीं छो़डता था। मैंने तो हॉकी का स्वर्णिम काल देखा है।"" दर्शकों की शिकायत को ध्यान में रखते हुए मथुरा रोड और पुराना किला रोड पर दो टिकट काउंटर बनाए गए हैं। यहां से दर्शक ब़डी आसानी से टिकट खरीद सकते हैं। भारत के लिए यह मुकाबला काफी अहम है। एक तो उसे आस्टे्रलिया को हराकर विश्व कप में मिली हार का हिसाब बराबर करना है और दूसरे उसे अपने घरेलू दर्शकों की कसौटी पर खरा उतरना है। यह टीम भाग्यशाली है कि उसे आठ महीने के भीतर दूसरी बार घरेलू दर्शकों के बीच ब़डे आयोजन में हिस्सा लेने का मौका मिला है। टीम को इस मौके को भुनाना होगा क्योंकि दर्शकों की हौसला अफजाई कभी-कभी वाकई काम की साबित होती है। मलेशिया के साथ खेले गए पहले मुकाबले में ब़डी संख्या में दर्शक टीम के समर्थन में पहुंचे थे। टीम ने हालांकि अपने स्तर के मुताबिक खेल नहीं दिखाया था लेकिन वह जीत हासिल करने में सफल रही थी।





















