लखनऊ। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रामगंगा, कोसी, मालन और गंगा के लगातार पिछले कुछ दिनों से खतरे के निशान से नीचे बहने से अब हालात पहले से काफी बेहतर हुए हैं।
क्षेत्र के बिजनौर, अमरोहा, कांशीरामनगर, मुजफ्फरनगर, बरेली, रामपुर, बुलंदशहर, मेरठ, सहारनपुर फरूखाबाद, बदायूं, शाहजहांपुर और उन्नाव जिलों के ज्यादातर बाढ़ प्रभावित गांवों से पानी उतर चुका है और हालात तेजी से सामान्य हो रहे हैं। इन जिलों के निचले इलाकों के दो हजार से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया था। कई जिलों में राहत कार्य के लिए सेना को लगाया गया था। बाढ़ से बेघर हुए लाखों लोगों को प्रशासन द्वारा बनाए गए अस्थायी शिविरों में शरण लेनी प़डी थी। बिजनौर के अपर जिलाधिकारी (वित्त) रेवा राम सिंह ने शुक्रवार को आईएएनएस को बताया कि ज्यादातर गांवों में बाढ़ का पानी उतर गया है। अब लोग अपने घरों को लौटने लगे हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ के पानी से बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हुए दिल्ली-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग-24 की मरम्मत का काम जारी है। इस राजमार्ग पर फिलहाल यातायात शुरू नहीं हो सका है। लखनऊ स्थित राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक प्रदेश में बाढ़ और बारिश से जु़डी घटनाओं में 120 लोगों की मौत हुई। 20 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए और करीब 10 लाख हेक्टेयर फसल चौपट हो गई। बारिश और उत्तराखण्ड के बांधों से भारी मात्रा में पानी छो़डे जाने के कारण रामगंगा, मालन, कोसी और गंगा नदी उफान पर आ गई थीं। उधर, घाघरा और शारदा नदियों के कहर से गोंडा, बाराबंकी, बहराइच सहित पूर्वी उत्तर प्रदेश में 12 जिले बाढ़ से प्रभावित हुए।





















