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भारत समाचार

उत्तर भारत में बाढ़ के हालात में सुधार

नई दिल्ली। उत्तर भारत सहित बिहार में बाढ़ की स्थिति में सुधार होने से लोगों को राहत मिली है। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखण्ड में हालत पहले से बेहतर हुए हैं।

हिमाचल प्रदेश और दिल्ली में बाढ़ का पानी कम हो रहा है। प्रभावित इलाकों में सेना की मदद से प्रशासन राहत एवं बचाव कार्य में जुटा हुआ है। दिल्ली में यमुना नदी का जलस्तर खतरे के निशान 204.83 मीटर से ऊपर बना हुआ है और कई निचले इलाकों में अभी भी पानी भरा हुआ है। यमुना का जलस्तर शुक्रवार सुबह नौ बजे 206.14 मीटर दर्ज किया गया था जिसके शाम तक 205.85 मीटर तक पहुंचने की संभावना है। शहर के अंतर्राज्यीय बस अड्डे पर पानी भरा हुआ हैं। बुधवार को नदी के जलस्तर ने 32 सालों का रिकार्ड तो़ड दिया था, जिसके बाद गढ़ी मांडु, उस्मानपुर, जगतपुर गांव, शास्त्री नगर, यमुना विहार, मदनपुर, सोनिया विहार, निगमबोध घाट, जैतपुर, तिब्बती मार्केट और यमुना बाजार इलाकों में पानी प्रवेश कर गया था। यमुना नदी के जलस्तर में गुरूवार से ही कमी हो रही है। इधर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में भी बाढ़ की स्थिति में सुधार हो रहा है।

बिजनौर और मुरादाबाद में हालांकि स्थिति सामान्य होने में अभी समय लगेगा। बाढ़ प्रभावित इलाकों में पिछले 24 घंटे के दौरान सात लोगों की मौत हुई है। आगरा में यमुना का जलस्तर खतरे के निशान 495 फुट से दो मीटर ऊपर पहुंच गया है। गुरूवार को जलस्तर 496.2 फुट तक पहुंच गया था। गोकुल और ओखला बैराज से गुरूवार को और अधिक पानी छो़डा गया जिससे जलस्तर 499 फुट तक पहुंच जाने की संभावना है। इसके अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिकांश जिलों में रामगंगा, कोसी, मालन और गंगा नदियों की तबाही जारी है। बाढ़ की वजह से अब तक करीब पांच लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। बिजनौर, अमरोहा, शाहजहांपुर, बरेली, रामपुर, बुलंदशहर, सहारनपुर, बदांयू और फर्रूखाबाद जिलों में रामगंगा, मालन, कोसी और गंगा नदी लगातार उफान पर है, जिससे इन जिलों के निचले इलाकों के 500 से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। उधर, हिमाचल प्रदेश में पिछले तीन दिनों से हो रही मध्यम से भारी बारिश के बाद शुक्रवार सुबह धूप खिली, लेकिन साथ में सर्द हवाएं भी चलीं। शिमला में मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक मनमोहन सिंह ने आईएएनएस को बताया, ""राज्य के ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी और मध्य व निचले क्षेत्रों में भारी बारिश के बाद शुक्रवार सुबह धूप खिली।"" एक सरकारी प्रवक्ता का कहना है कि गुरूवार से बारिश में कमी आई है। इसके चलते सतलुज, ब्यास, यमुना और उनकी सहायक नदियों के जलस्तर में कमी आनी शुरू हो गई है। राज्य में मूसलाधार बारिश के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 21 और 22 पर भारी भूस्खलन हुआ है। इसकी वजह से शिमला, किन्नौर, मंडी और कुल्लू जिले के आतंरिक हिस्सों में यातायात प्रभावित हुआ है। बिहार के गोपालगंज जिले में गंडक नदी के तटबंध टूटने के बाद आई बाढ़ में तेजी से सुधार हो रहा है। जिले के एक-दो गांवों को छो़डकर आसपास के सभी गांवों में बाढ़ का पानी तेजी से घट रहा है।

राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव व्यास जी ने बताया कि सेमरिया गांव में अभी भी बाढ़ का पानी फैला हुआ है। जिले के चार प्रखंडों सिधवलिया, बरौली, बैकुंठपुर तथा मांझा में एक मेगा शिविर तथा पांच राहत कैम्प खोले गये हैं। उत्तराखण्ड में बारिश और बाढ़ का कहर झेलने के बाद जनजीवन अब पटरी पर लौटने लगा है। भूस्खलन से सूबे की बंद प़डीं स़डकों को यातायात के लिए खोला जा रहा है। प्रसिद्ध बद्रीनाथ और केदारनाथ मार्ग पर यातायात सामान्य हो गया है। अन्य मार्गो पर यातायात सामान्य बनाने के लिए प्रशासन, सीमा स़डक संगठन और आईटीबीपी के जवान युद्ध स्तर पर काम में जुटे हैं। हालांकि, गंगोत्री और यमुनोत्री मार्ग पर यातायात अभी भी सामान्य नहीं हो पाया है। आपदा प्रबंधन केंद्र के अनुसार राज्य में जगह-जगह फंसे यात्रियों को हेलीकॉप्टर से निकाला जा रहा है। केंद्र के एक आकिारी ने बताया कि उत्तरकाशी जिले के ब़डकोट और चिनयाली से़ड में फंसे यात्रियों को हेलीकॉप्टर से देहरादून स्थित जौली ग्रांट हवाई अड्डे पर लाया जा रहा है।  

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