नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एटार्नी जनरल से कहा है कि लगभग सात करोड परिवार को बीपीएल की सूची में शामिल न करने का कारण बताया जाए। राज्य और केन्द्र सरकार के आंकडे बीपीएल परिवारों की संख्या अलग अलग बता रहे है।
अनाज के खुले आसमान में सडने के लिए छोडने के बेहतर है कि गरीब का पेट भरा जाए। अतिरिक्त अनाज को चूहों के हवाले करने से बेहतर है कि उसका वितरण गरीबों के बीच किया जाए। अनाज भूखे लोगों के पास पहुंचना जरूरी है। जस्टिस दलवीर भंडारी और दीपक वर्मा की बेंच प्रधानमंत्री की टिप्पणी के बावजूद सार्वजनिक वितरण प्रणाली में अनियिमतता को लेकर दायर जनहित याचिका पर लगातार सुनवाई कर रही है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह साफतौर पर कह चुके है कि सुप्रीम कोर्ट को नीतिगत मसलों पर दखल नहीं देना चाहिए। शुक्रवार को बेंच ने कहा कि सिर्फ नीति बनाने से काम नहीं चलेगा। नीतियों को जमीनी स्तर पर लागू करने की जरूरत है। बेंच ने सरकार को याद दिलाया कि नौ साल पहले ही अनाज के स्टोरेज को लेकर आ रही समस्याओं की ओर केन्द्र का ध्यान आकर्षित किया गया था।
एफसीआई के गोदामों में अनाज के भंडारण की जगह नहीं बची है। अनाज को समुद्र में फेक नहीं सकते। बेंच ने कहाकि किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए खाद्यान्न की खरीद सरकार को ही करनी है।
अनाज का सुरक्षित भंडारण भी उतना ही आवश्यक है। अगर अनाज के उचित भंडारण की जगह नहीं है तो उसे सीधे पीडीएस के जरिए गरीबों तक भेजा जा सकता है।
भारत समाचार
चूहे खाएं, इससे बेहतर गरीबों में बांटा जाए अनाज : सुप्रीम कोर्ट





















