नई दिल्ली। कहते है मजबूरी कई हुनर खुद सिखा देती है। यह बात राष्ट्रमंडल खेल एथलेटिक्स की व्यक्तिगत स्पर्धा में पहला पदक जीतने वाली धाविका कविता राउत पर सटीक बैठती है। कविता ने महिलाओं की दस हजार मीटर दौड में कांस्य पदक जीता था। महाराष्ट्र के नासिक जिले के एक गांव में गरीब परिवार में जन्मी कविता के लिए एथलेटिक्स में हाथ अजमाने के अलावा और कोई रास्ता नहीं था। इतनी बडी उपलब्धि अपने नाम करने के बाद कविता को अपने फैसले पर कोई पछतावा नहीं है।
नासिक के सबपद्दा गांव से ताल्लुक रखने वाली कविता (25) ने कहा कि उन्होंने इस लिए दौड को चुना क्योकि यह नंगे पांव और बिना धन खर्च किए अपाया जा सकता है। कविता ने कह कि मैं बहुत गरीब परिवार से हूं। मेरा एक छोटा तथा बडा भाई है। मैं किसी खेल में हिस्सा लेना चाहती थी लेकिन मेरा परिवार इसका खर्च नहीं उठा सकता था। नंगे पांव दौड सकने के कारण मैंने इसे चुना।
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गरीबी ने बनाया धावक : कविता राउत





















