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भारत-जर्मनी आपसी व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखें

नई दिल्ली। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने रविवार को कहा कि भारत और जर्मनी को अपने संभावित भागीदारी क्षेत्रों की पहचान करके वर्ष 2014 तक आपसी व्यापार को दो गुना कर 30 अरब डॉलर करने का लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए।
सीआईआई ने जारी एक रिपोर्ट में कहा, ""दोनों देशों को आपसी सम्मान और लंबे समय से चले आ रहे आर्थिक संबंधों की मजबूत नींव के चलते मौजूदा तेज विकास दर और उच्च स्तरीय आर्थिक सहयोग का लाभ उठाने की जरूरत है।"" गौरतलब है कि वर्ष 2009-10 के दौरान भारत और जर्मनी के बीच 15.7 अरब डॉलर का कारोबार हुआ। भारत का जर्मनी पांचवां सबसे ब़डा निर्यात साझेदार है। वर्ष 2009-10 में भारत ने जर्मनी को 5.4 अरब डॉलर का निर्यात किया। साथ ही आठवें सबसे ब़डे आयातक साझेदार के तौर पर भारत ने जर्मनी से 10.3 अरब डॉलर का आयात किया है। भारत, जर्मनी से मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स प्रौद्योगिकी, धातुओं से बने उत्पाद, लौह एवं इस्पात और ऑटोमेटिव उत्पादों का आयात करता है।
वहीं भारत परिधान, बिजली के उपकरण और कार्बनिक रसायनों का जर्मनी को निर्यात करता है। वर्ष 2009 में भारत में जर्मनी का कुल निवेश 2.8 अरब डॉलर रहा। जर्मनी भारत के लिए प्रौद्योगिकी का ब़डा आपूर्तिकर्ता रहा है। भारत को अपने कुल प्रौद्योगिकी हस्तांतर के 13 प्रतिशत सौदे जर्मनी से मिलते हैं।  

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