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भारत समाचार

औद्योगिकी उत्पादन की दर गिरकर 4.4 प्रतिशत हुई

नई दिल्ली। देश में औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) में वृद्धि की दर सितम्बर में घटकर 4.4 प्रतिशत के निराशाजनक स्तर पर पहुंच गई। पिछले साल के इसी महीने में यह दर 8.2 प्रतिशत रही थी। यह गिरावट पूंजीगत वस्तुओं के उत्पादन में कमी के चलते हुई है।
आईआईपी वृद्धि दर में लगातार दूसरे महीने इस गिरावट से सरकार की चिंताएं बढ़ गई हैं। सरकार ने इस साल अर्थव्यवस्था में 8.5 प्रतिशत की विकास दर हासिल करने का लक्ष्य रखा है। इस गिरावट से चिंतित केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा, ""हम इस गिरावट के कारणों की पहचान करेंगे।"" मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर 10.2 प्रतिशत रही है।
अगस्त महीने की संशोधित आईआईपी दर 6.9 प्रतिशत रही है जो कि पहले 5.6 प्रतिशत घोषित की गई थी। केंद्रीय सांख्यिकी संगठन द्वारा जारी आक़डों के मुताबिक आईआईपी में शामिल 17 में से 14 उद्योगों में सितम्बर में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है लेकिन यह वृद्धि काफी कम है।
आईआईपी में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी वाले विनिर्माण क्षेत्र में सितम्बर में उत्पादन वृद्धि दर 4.5 प्रतिशत रही जो कि पिछले साल के इसी महीने में 11 प्रतिशत दर्ज की गई थी। बिजली उत्पादन क्षेत्र में भी तेज गिरावट दर्ज की गई है इस दौरान बिजली उत्पादन में 1.7 प्रतिशत की दर से वृद्धि हुई है जबकि 2009 के सितम्बर महीने में इसमें 3.8 प्रतिशत की दर से वृद्धि हुई थी। खनन क्षेत्र की विकास दर सितम्बर महीने में 5.2 प्रतिशत रही है जबकि पिछले साल के इसी महीने में यह दर 8.7 प्रतिशत दर्ज की गई थी।
पूंजीगत वस्तुओं में इस महीने 4.2 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की गई है। इंटरमीडिएट गुड्स का उत्पादन 10.3 प्रतिशत और बुनियादी वस्तुओं का उत्पादन 3.5 प्रतिशत की दर से बढ़ा है। उपभोक्ता वस्तुओं का उत्पादन इस महीने 5.2 प्रतिशत और टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं का उत्पादन 10.9 प्रतिशत की दर से बढ़ा है। इसके अलावा गैर टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं का उत्पादन 2.5 प्रतिशत की दर से बढ़ा है।  

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