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भारत समाचार

भारत के लिए मनोबल बढ़ाने वाली रही श्रृंखला

नई दिल्ली। राष्ट्रमंडल खेलों के आगाज के साथ मोहाली में शुरू हुई भारत-आस्टे्रलिया क्रिकेट श्रृंखला कई मायनों में खास रही। एक तो इसने 19वें राष्ट्रमंडल खेलों की "गूंज" के बीच सुर्खियां बटोरीं और दूसरे इसने भविष्य के लिए भारतीय खिलाडियों के मनोबल को मजबूत किया है।
मडगांव में रविवार को खेले जाने वाले तीसरे एकदिवसीय मुकाबले के बारिश के कारण धुलने से इस श्रृंखला की निराशाजनक समाप्ति हुई लेकिन भारतीय टीम ने एकदिवसीय श्रृंखला पर 1-0 से और उससे पहले खेली गई दो मैचों की टेस्ट श्रृंखला पर 2-0 से जीत हासिल कर एक शानदार मुकाम हासिल किया। दर्शकों के लिहाज से यह श्रृंखला मिश्रित रही। टेस्ट श्रृंखला में दर्शकों ने अपनी टीम के शानदार प्रदर्शन का दीदार किया लेकिन एकदिवसीय श्रृंखला के दौरान को मैचौं के बारिश के कारण धुलने से उन्हें निराशा हाथ लगी। वैसे विशाखापट्टनम के दर्शक भाग्यशाली रहे क्योंकि उनके घरेलू मैदान पर भारतीय टीम ने अपने युवा ब्रिगेड की बदौलत आस्टे्रलिया को जोरदार पटखनी दी। इस श्रृंखला की शुरूआत से पहले कहा जा रहा था कि टेस्ट वरीयता क्रम में नम्बर-1 क्रम पर काबिज महेंद्र सिंह धौनी की टीम को आस्टे्रलिया को पटखनी देने में काफी मुश्किलें होंगी लेकिन मोहाली और फिर बेंगलुरू में पोटिंग की टीम को धूल चटाकर भारतीय खिलाडियों ने साबित कर दिया कि वे ही असल में नम्बर-1 हैं। इस दौरान आस्टे्रलियाई टीम का मनोबल काफी नीचे चला गया। इसी का नतीजा था कि विशाखापट्टनम में 290 रनों के सम्मानजनक योग के बावजूद आस्टे्रलियाई टीम अपने सम्मान की रक्षा नहीं कर सकी। टेस्ट श्रृंखला गंवाने के बाद काफी हद तक आस्टे्रलिया का ध्यान भारत दौरे से हटकर एशेज श्रृंखला पर टिक गया था। माइकल हसी और जगलस बोलिंगर को गोवा एकदिवसीय मुकाबले से पहले स्वदेश रवाना करना इसका सबसे ब़डा उदाहरण है। मेहमान टीम को इस बात का आभास हो गया था कि टेस्ट श्रृंखला गंवाने के बाद उसकी जो फजीहत हुई है, उसकी भरपाई एकदिवसीय श्रृंखला 1-1 से बराबर करने पर नहीं हो सकती, लिहाजा उसने अपने प्रमुख खिलाडियों को आराम और इलाज के लिए स्वदेश रवाना कर दिया क्योंकि इस फजीहत की भरपाई उसे एशेज से करनी थी, जो अगले महीने शुरू हो रही है। भारत-आस्टे्रलिया श्रृंखला के सामने राष्ट्रमंडल खेलों के मध्य में चर्चा बटोरने की चुनौती थी, जिसे वह सफलतापूर्वक पार करने में सफल रही। निशानेबाजों, पहलवानों और कृष्णा पूनिया के स्वर्ण के बीच भारतीय टीम दूसरे टेस्ट में मिली जीत के साथ सभी प्रमुख समाचार पत्रों के मुख्य पृष्ठ पर जगह पाने में सफल रही थी। इस श्रृंखला की शुरूआत में राष्ट्रमंडल खेलों से जु़डी अच्छी और बुरी खबरों के कारण क्रिकेट को समाचार पत्रों में वह स्थान नहीं मिल पा रहा था, जो आमतौर पर उसे मिलता है लेकिन मोहाली और बेंगलुरू में शानदार प्रदर्शन के बाद क्रिकेट एक बार फिर चर्चा के केंद्र में लौट आया। टेस्ट श्रृंखला में मिली जीत ने युवाओं का मनोबल सातवें आसमान पर पहुंचा दिया और इसी का नतीजा था कि युवाओं ने विशाखापट्टनम में अपनी टीम की जीत में अहम योगदान दिया। आने वाले दिनों में भारतीय टीम को न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के साथ भि़डना है। दोनौं श्रृंखला भारत के लिए अहम है क्योंकि अगले वर्ष उसे विश्व कप में हिस्सा लेना है। अपने घर में हो रहे इस विश्व कप के लिए भारत और श्रीलंका की टीमों को खिताब का दावेदार माना जा रहा है। भारतीय खिल़ाडी आस्टे्रलिया की थाह ले चुके हैं और अब उन्हें न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका की थाह लेनी है। ऎस में आगामी दो श्रृंखलाएं यह तय करेंगी कि विश्व कप में भारत का प्रदर्शन मुख्य तौर पर किस स्तर का होगा।  

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