नई दिल्ली। राज्यसभा में गुरूवार को महंगाई के मुद्दे पर सरकार को कटघरे में ख़डा करने के विपक्ष के प्रयास को विफल करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने महंगाई से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाने की अपील की।
मूल्य-वृद्धि के मुद्दे पर दिनभर चली बहस के बाद मुखर्जी ने महंगाई के लिए आपूर्ति में कमी को जिम्मेदार ठहराया। वहीं असंतुष्ट विपक्ष ने कहा है कि वित्त मंत्री ने कीमतें कम होने का कोई आश्वासन नहीं दिया है। बुधवार को लोकसभा में पास किए गए प्रस्ताव की तरह राज्यसभा में भी महंगाई के खिलाफ कदम उठाने के लिए सरकार को प्रयास करने के लिए प्रस्ताव पारित किया गया। मुखर्जी ने कहा, ""मुख्य समस्या आपूर्तिगत बाधाएं हैं। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) व्यवस्था को लागू करने का काम केवल राज्य सरकारों का है।"" चीनी, खाद्य तेलों और दालों की कमी बताते हुए उन्होंने कहा कि गरीबी रेखा के नीचे रह रहे लोगों के संरक्षण के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत बनाया जाए। राज्यों की पीडीएस के बेहतर प्रबंधन की जिम्मेदारी पर जोर देते हुए मुखर्जी ने कहा, ""यदि हमारा सार्वजनिक वितरण तंत्र सुस्थापित और बेहतर होता तो हम गरीबों को भरपूर राहत उपलब्ध करा सकते थे लेकिन दुर्भाग्य से ऎसा नहीं है। मुख्यमंत्रियों के साथ हुई बैठक में हमने इस तंत्र के पुनस्र्थापन के लिए कुछ निर्णय लिए थे।"" वित्त मंत्री ने कहा, ""सार्वजनिक वितरण प्रणाली को केंद्रीकृत करना संभव नहीं है। इतने ब़डे देश में वितरण प्रणाली को एक जगह से संचालित नहीं किया जा सकता। प्रदेश सरकारों ने इस तंत्र का विकेंद्रीकरण करके उन्हें पंचायतों के स्तर तक नहीं पहुंचाया है।"" उन्होंने कहा, ""यदि हम एक तंत्र लागू नहीं कर सकते तो हम इसका केंद्रीकरण कैसे कर सकते हैंक्"" पेट्रोलियम पदार्थो की कीमतों में वृद्धि के फैसले का बचाव करते हुए मुखर्जी ने कहा कि इस समय तेल कंपनियों पर दबाव कम करने की आवश्यकता है।
भारत समाचार
महंगाई पर नियंत्रण के लिए सामूहिक प्रयास की अपील





















