सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश में एक महिला कैदी सलाखो के पीछे से साक्षरता अभियान चलाकर ज्ञान की रोशनी फैला रही है। दहेज उत्पी़डन के मामले में सजा प्राप्त उर्मिला देवी (48 वर्ष) सिद्धार्थनगर जिला जेल में महिला कैदियो और उनके बच्चो को शिक्षित कर रही हैं। उर्मिला जेल की करीब 40 महिला कैदियो को पढ़ाती हैं। जिन महिला कैदियो के छोटे बच्चो हैं, वे भी कक्षा में उपस्थित होकर पढ़ाई करते हैं। पूरी जेल में "मास्टरनी जी" के नाम से मशहूर उर्मिला महिला बैरक में हर रोज सुबह नौ बजे से पढ़ाना शुरू कर देती हैं। जेल अधीक्षक पी.के.श्रीवास्तव ने संवाददाताओं को बताया कि वह बहुत चुप रहती हैं। जेल के दूसरे कैदियो की तरह वह जेलकर्मियो से बातचीत नहीं करतीं। श्रीवास्तव ने कहा कि कई बार उन्होंने यह जानने का प्रयास किया कि किस चीज ने उन्हें कैदियो को पढ़ाने के लिए प्रेरित किया लेकिन उन्होंने कभी इस बारे में कुछ नहीं कहा। वह अपनी पिछली जिंदगी के बारे में कोई बात नहीं करना चाहतीं। अपनी कक्षा में उर्मिला कैदियो को हिंदी, अंग्रेजी की वर्णमाला, गणित के अंकों का जो़ड-घटाना व नैतिक शिक्षा के पाठ पढ़ाती हैं। जेलर ए.के.सक्सेना ने कहा कि वह कक्षा लेने में समय की बहुत पाबंद हैं। साक्षरता फैलाने की मुहिम को लेकर उनकी गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वह बीमार होने पर भी पढ़ाती हैं।
जेल अधिकारियो के मुताबिक उर्मिला पिछले आठ महाने से पढ़ा रही हैं। विगत एक साल से वह जेल में बंद हैं। उनको तीन साल की सजा हुई है। सक्सेना के मुताबिक कुछ अधिकारियो ने पहले उन्हें महिला कैदियो को अनौपचारिक तरीके से पढ़ाते हुए देखा। उस समय तनिक भी अंदाजा नहीं था कि कैदियों को पढ़ाना उर्मिला के जीवन का नियमित अंग बन जाएगा। जेल प्रशासन ने महिला कैदियो को पढ़ाने को लेकर उनकी गंभीरता को देखकर एक ब्लैकबोर्ड, चॉक व अन्य सामग्री मुहैया करा दी है।
भारत समाचार
सलाखों के पीछे ज्ञान की रोशनी फैला रही हैं मास्टरनीजी





















