दुबई/लंदन। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने शुक्रवार को मैच फिक्सिंग के आरोपी पाकिस्तानी खिल़ाडी-मोहम्मद आसिफ, मोहम्मद आमेर और सलमान बट्ट को जांच पूरी होने तक निलंबित करते हुए उनके खिलाफ आपराधिक जांच की बात कही।
आईसीसी ने भले ही तीनों आरोपी खिलाडियों को निलंबित कर दिया हो लेकिन पाकिस्तान अब भी यह मानने को तैयार नहीं है कि ये खिल़ाडी दोषी हैं। इसे लेकर लंदन में पाकिस्तानी उच्चायुक्त वाजिद शमसुल हसन ने आईसीसी की आलोचना की है। उच्चायुक्त ने इस फैसले को "गैरजरूरी" करार दिया है।
आईसीसी ने तीनों खिलाç़डयों को निलंबित करने के 12 घंटे के बाद उनके खिलाफ आपराधिक जांच की बात कही। आईसीसी ने क्रिकेट की साख को बनाए रखने की दिशा में अभूतपूर्व कदम उठाते हुए गुरूवार देर रात तीनों खिलाडियों को निलंबित करने की घोषणा की थी। आईसीसी ने अपने बयान में कहा था कि तीनों खिलाडियों को भ्रष्टाचार निरोधी अधिनियम के अंतर्गत निलंबित किया जा रहा है। आईसीसी ने शुक्रवार को लंदन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में साफ कर दिया कि उसने तीनों खिलाडियों के निलंबन की आधिकारिक जानकारी खिलाडियों और उनके संबद्ध बोर्ड को दे दी है। साथ ही उनसे यह भी कहा कि आरोपी खिलाडियों के खिलाफ आपराधिक जांच की जाएगी। यह पहला मौका है जब आईसीसी ने भ्रष्टाचार निरोधी अधिनियम के अंतर्गत आरोप के घेरे में आए खिलाडियों को निलंबित करते हुए आपराधिक जांच करने का फैसला किया है। आईसीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हारून लोगार्ट ने कहा, ""भ्रष्टाचार निरोधी अधिनियम के अंतर्गत स्पॉट फिक्सिंग या मैच फिक्सिंग के आरोपों से घिरे खिलाडियों के खिलाफ आपराधिक जांच की जाएगी। इसके पूरा होने तक इन खिलाडियों को किसी भी स्तर पर क्रिकेट खेलने की इजाजत नहीं मिल सकती।"" लोगार्ट ने कहा, ""हम इस मामले को काफी गंभीरता से ले रहे हैं और दोषी को सामने लाने के लिए कोई कसर नहीं छो़डा जाएगा। इस बात की जानकारी खिलाडियों के साथ-साथ पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को दे दी गई है।"" आईसीसी के फैसले को "गैरजरूरी" बताते हुए हसन ने कहा, ""ऎसे में जबकि इसे लेकर पुलिस जांच जारी है, किसी भी संस्था को इस मामले से फिलहाल दूर ही रहना चाहिए था। खिल़ाडी स्वेच्छा से क्रिकेट से दूर जा चुके हैं, ऎसे में यह फैसला न्यायोचित और वक्त के हिसाब से जायज नहीं है।"" हसन ने कहा उनकी तीनों खिलाडियों से बात हुई है। तीनों ने खुद को निर्दोष करार दिया है। हसन ने कहा, ""जो कुछ हो रहा है उससे तीनों बहुत परेशान हैं। इस स्थिति में खेल पर ध्यान लगा पाना नामुमकिन है। उन्होंने साफ किया है कि वे निर्दोष हैं और जांच पूरी होने तक टीम से दूर ही रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि बिना कारण के उन्हें मानसिक तौर पर परेशान किया जा रहा है।"" पाकिस्तान ने खिलाडियों को दोषी मानने के बजाय इस संबंध में सारा आरोप परोक्ष रूप से भारतीय सटोरियों पर मढ़ा है। हसन ने इस संबंध में आईसीसी के संवाददाता सम्मेलन से पहले समाचार चैनल "एनडीटीवी" के साथ बातचीत के दौरान कहा, ""इस मामले में आरोपी मजहर माजिद ने कुछ एशियाई सटोरियों की मदद से तीनों खिलाडियों को फंसाया है।"" हसन ने कहा कि ब्रिटिश मीडिया कह रहा है कि इस मामले में शामिल सटोरिए एशियाई हैं लेकिन अगर वे पाकिस्तानी हैं तो ब्रिटिश मीडिया ने उन्हें साफ तौर पर पाकिस्तानी कहकर पुकारा होता। ऎसे में यह साफ है कि इस मामले में भारतीय सटोरिए शामिल हैं। हसन ने यह भी मानने से इंकार कर दिया कि तीनों आरोपी खिलाडियों को स्पॉट फिक्सिंग के आरोपों के कारण ही टीम से हटाया गया है। उन्होंने कहा कि तीनों ने खुद ही श्रृंखला से दूर रहने का फैसला किया है। सलमान बट्ट के सामान से मिली नकदी : इस बीच, ब्रिटेन के समाचार पत्र "डेली मेल" ने खबर दी है कि मैच फिक्सिंग की घटना को सामने लाने वाले स्टिंग ऑपरेशन में जिस नकदी को मुख्य आरोपी मजहर माजिद के हाथ में दिखाया गया था, वह कथित तौर पर बट्ट के सामान में से मिली है। पत्र के मुताबिक स्कॉटलैंड यार्ड पुलिस ने जांच के दौरान बट्ट के सामान से वह नकदी बरामद की है और इस मामले में वह शुक्रवार को बट्ट के साथ पूछताछ करेगी।
पुलिस का कहना है कि कुछ नकदी लॉड्र्स स्टेडियम में स्थित बट्ट के लॉकर से भी मिली है। स्कॉटलैंड यार्ड को अंदेशा है कि यह नकदी उस 150,000 पाउंड का हिस्सा हो सकती है, जिसे माजिद को समाचार पत्र "न्यूज ऑफ द वल्र्ड" के संवाददाता से लेते हुए स्टिंग ऑपरेशन में दिखाया गया था। इसी स्टिंग ऑपरेशन के आधार पर बट्ट सहित तीन खिलाडियों पर मैच फिक्सिंग की जांच चल रही है। माजिद ने समाचार पत्र से दावा किया था कि कप्तान सलमान बट्ट सहित कई खिल़ाडी उसकी मुट्ठी में हैं और वह पैसे के दम पर पाकिस्तानी खिलाडियों को लॉड्र्स टेस्ट मैच में नो-बॉल फेंकने के लिए तैयार कर सकता है। माजिद का दावा ठीक निकला और उसके बताए गए क्षण में ही पाकिस्तानी तेज गेंदबाज मोहम्मद आसिफ और मोहम्मद आमेर ने नो-बॉल फेंकी थी। माजिद ने कहा था कि बट्ट को इस फिक्सिंग की पूरी जानकारी है। आईसीसी ने इस संबंध में कहा कि वह जांच की रिपोर्ट आने तक प्रतिक्रिया जाहिर नहीं करेगा लेकिन खिलाडियों को निलंबित करने और उनके खिलाफ आपराधिक जांच कराने का फैसला भ्रष्टाचार निरोधी इकाई के मुख्य परिचालन अधिकारी रवि सावानी और लंदन के मेट्रोपॉलिटन पुलिस के वित्तीय अपराध शाखा के अधिकारियों से मुलाकात के बाद किया गया है।
भारत समाचार
मैच फिक्सिंग विवाद : क्रिकेट की साख बचाने के लिए आपराधिक जांच





















