भोपाल। मध्य प्रदेश में मानवाधिकार आयोग का गठन पीडितों को न्याय दिलाने लिए किया गया था लेकिन इस शब्द का सहारा लेकर कई तथाकथित लोग समाजसेवी संगठन बनाकर आम लोगों का उत्पी़डन कर रहे है। इस बात से आयोग भी चिंतित है।
प्रदेश में समाजसेवा को "धंधा" बनाने वाले लोगों की कमी नहीं है। ऎसे कई लोग हैं जिन्होंने "मानवाधिकार" के नाम से संगठन बना लिए हैं। ऎसे संगठन पीडितों की मदद की बजाय उनको अपना शिकार बना रहे हैं। मानवाधिकार के नाम से बने संगठनों से आयोग की छवि प्रभावित हो रही है। इस स्थिति की खबर मानवाधिकार आयोग तक शिकायत के जरिए पहुंच गई है। उसने गृह विभाग के प्रमुख सचिव सहित प्रदेश के तमाम पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वे मानवाधिकार आयोग के नाम से मिलते-जुलते नाम वाले तमाम संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करें।
जबलपुर के एस. सी. बटालिया ने मानवाधिकार के नाम से चल रहे संगठनों की आयोग से शिकायत की है। आयोग ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मानवाधिकार के नाम से चलाए जा रहे रहे संगठनों को अवैध बताया है। साथ ही कार्रवाई के निर्देश दिए हैं ताकि ऎसे संगठनों पर संवैधानिक रोक लग सके।




















