नई दिल्ली/तिरूवनंतपुरम। भारतीय ज्ञानपीठ ने शुक्रवार को 43वें और 44वें ज्ञानपीठ पुरस्कारों की एक साथ घोषणा की। ये पुरस्कार उर्दू के जाने-माने साहित्यकार शहरयार और मलयालम कवि नीलकानंदन वेलु कुरूप को दिए जाएंगे। ज्ञानपीठ की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता सीताकांत महापात्र की अध्यक्षता में चयन समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया। चयन समिति के अन्य सदस्य प्रो. मैनेजर पाण्डेय, डा. के.सçच्चादानंदन, प्रो. गोपीचंद नारंग, गुरदयाल सिंह, केशुभाई देसाई, दिनेश मिश्रा और रवींद्र कालिया बैठक में मौजूद थे। वर्ष 2007 के लिए 43वें ज्ञानपीठ पुरस्कार पाने वाले मलयालम कवि ओ.एन.पी. कुरूप का जन्म 1931 में केरल में हुआ था। वर्ष 2008 के लिए 44वें ज्ञानपीठ पुरस्कार पाने वाले उर्दू शायर शहरयार का जन्म 1936 में हुआ था। फिल्म गमन, आहिस्ता-आहिस्ता और उमराव जान के गीतों ने उन्हें विशेष पहचान दिलाई।
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शहरयार और कुरूप को ज्ञानपीठ पुररस्कार





















