नई दिल्ली। रूचिका गिरहोत्रा छे़डछ़ाड और खुदकुशी मामले में सजा काट रहे हरियाणा के पूर्व पुलिस महानिदेशक एसपीएस राठौर को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी है। रूचिका छे़डखानी और खुदकशी मामले में 18 महीने की जेल काट रहा राठौर अब जेल से बाहर आ गए हैं। हालांकि अदालत ने उनके देश से बाहर जाने पर रोक लगा दी है। राठौर ने 18 महीने की जेल की सजा के फैसले के किलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। राठौर को ट्रायल कोर्ट से छह महीने की सजा हुई थी, लेकिन सेशन कोर्ट ने सीबीआई की सजा बढ़ाने की अपील को स्वीकार करते हुए इसे बढ़ाकर 18 महीने कर दिया था। राठौर को नाबालिग रूचिका के साथ छे़डछ़ाड का दोषी पाया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सीबीआई की सिफारिश पर किया। मामले की जांच कर रही सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि राठौर के खिलाफ दोष तय नहीं होते हैं। सीबीआई का कहना है कि रूचिका ने जब खुदकशी की तब राठौर चंडीगढ़ में नहीं था। सीबीआई ने परिवार वालों का यह आरोप भी बेबुनियाद बताया है कि राठौर ने रूचिका के भाई को टॉर्चर किया और झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई। सीबीआई के मुताबिक रूचिका के भाई आशु के खिलाफ कार चोरी के मामलों में होने के सबूत हैं।
इसी के साथ सीबीआई ने रूचिका गिरहोत्रा मामले से जु़डे दो मुख्य केस बंद कर दिए हैं। इनमें रूचिका के भाई के उत्पी़डन से जु़डा केस और रूचिका से छे़डछ़ाड का मामला शामिल हैं। रूचिका के भाई आशु का आरोप था कि उसे ग़ाडी चोरी के झूठे मुकदमों में फंसाया गया और जमानत मिलने के बावजूद उसे नाजायज तौर पर हिरासत में रखा गया। साथ ही राठौर के कहने पर उसे बुरी तरह टॉर्चर किया गया। उसे हथक़डी पहनाकर अर्धनग्न हालत में मनसा देवी चौकी में घुमाया गय। यही नहीं, उसके पिता और बहन को भी प़डोसियों के सामने पुलिस ने बेइज्जत किया। लेकिन सीबीआई को सारे मामले में कोई सबूत नहीं मिले। सीबीआई का कहना है कि आशु गिरहोत्रा को 13 नवंबर, 1993 के बाद न कभी पक़डा गया, न कभी गिरफ्तार किया गया। वह अदालत में अपने वकील के साथ 26 नवंबर, 1993 को पेश भी हुआ। 30 दिसंबर, 1993 को वह अपनी बहन के अंतिम संस्कार में भी शामिल हुआ।
आशु के इस मामले के खारिज होने का सीधा मतलब है कि रूचिका को खुदकुशी के लिए मजबूर करने का मामला भी कमजोर प़डेगा, क्योंकि आरोप यही है कि रूचिका ने अपने भाई और पिता का हाल देखकर खुदकुशी कर ली थी। कोर्ट ने रूचिका के पिता और भाई को इस पर आपत्ति दर्ज करने के लिए 25 नवंबर तक का समय दिया है। यहां बता दें कि रूचिका ने 1993 में खुदकशी कर ली थी। हरियाणा के उस वक्त के डीजीपी एसपीएस राठौर पर रूचिका से छे़डखानी करने और उसे परेशान करने का आरोप लगा था।
भारत समाचार
सीबीआई की सिफारिश मिली राठौर को जमानत





















