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वर्षा नहीं होना चिंताजनक: सुब्बाराव

मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने मंगलवार को इस बात को रेखांकित किया कि जून और मध्य अक्टूबर के बीच की बारिश देश के लिए कितनी महत्वपूर्ण है। उन्होंने इसके महत्व को रेखांकित करने के लिए अलेक्जेंडर फ्रैटर की पुस्तक "चेसिंग द मानसून" के शीर्षक का इस्तेमाल किया।

सुब्बाराव ने यहां मौद्रिक नीति की पहली तिमाही की समीक्षा जारी करने के बाद एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, ""जब मैंने अपना करियर आरंभ किया था तो मेरी भावनात्मक बेहतरी पर, मेरे करियर पर मानसून का एक असर था।"" सुब्बाराव ने कहा, ""यदि बारिश होती है, तो धरती पर सबकुछ ठीक ठाक है और स्वर्ग में भी सबकुछ अच्छा है। आप अपने काम से लगे रहते हैं लेकिन यदि बारिश नहीं होती है, तो आप सभी ने जो किया वह सूखा राहत में गया। अब अपने करियर के अंतिम प़डाव पर मैंने महसूस किया कि मैं एक बार फिर मानसून की गिरफ्त में हूं।"" सुब्बाराव ने कहा, ""यदि बारिश होती है, तो मौद्रिक नीति कारगर होगी। सबकुछ ठीकठाक रहेगा। यदि बारिश नहीं होती है तो फिर यह चिंताजनक होगा। इसलिए मैं चाहता हूं कि आप सभी महसूस करें कि हम सभी "मानसून का पीछा कर रहे हैं"।"" सुब्बाराव की यह टिप्पणी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी द्वारा हाल में मानसून के बारे में की गई टिप्पणियों से मेल खाती है। मानसून के कारण देश में बारिश का दो तिहाई हिस्सा गिरता है और खेती के लिए जरूरी पानी की आधी मांग पूरी करता है। मनमोहन सिंह ने कहा था कि यदि इस मानसून में अच्छी बारिश हुई तो मौजूदा वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि 8.5 प्रतिशत हो सकती है।

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