मुंबई। लगातार बढ़ रही महंगाई पर लगाम कसने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी प्रमुख ब्याज दरों में वृद्धि कर दी है।
बैंक का अनुमान है कि इस वृद्धि के परिणामस्वरूप ऋण एवं जमा पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी हो सकती है। आरबीआई ने इस साल के लिए अपना विकास दर और महंगाई का अनुमान भी बढ़ा दिया है। बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए विकास दर का अनुमान 8 प्रतिशत से बढ़ाकर 8.5 प्रतिशत किया है वहीं महंगाई दर का अनुमान भी इस साल के लिए 5.5 प्रतिशत बढ़ाकर 6 प्रतिशत कर दिया है। अपनी तिमाही समीक्षा में सख्त तेवर अपनाते हुए रिजर्व बैंक के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने रेपो दर में 25 आधार अंकों की वृद्धि करके इसे 5.75 प्रतिशत कर दिया है और रिवर्स रेपो दर को 50 आधार अंक की तेज वृद्धि के जरिए 4.50 प्रतिशत कर दिया है।
अन्य दरों में हालांकि कोई बदलाव नहीं किया गया है। आरबीआई ने इस साल ब्याज दरों में चौथी बार बढ़ोतरी की है। इससे पहले 29 जनवरी, 19 मार्च और दो जुलाई को प्रमुख ब्याज दरों में वृद्धि की गई थी। जून महीने में महंगाई की दर 10.55 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई थी। मौद्रिक समीक्षा जारी करते हुए बैंक के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने कहा, ""मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ा है और यह सभी क्षेत्रों में देखने को मिला है लेकिन हम कीमतों में स्थिरता और महंगाई कम करने का लक्ष्य हासिल करने में सक्षम होंगे।"" रिजर्व बैंक से व्यावसायिक बैंकों द्वारा लिए जाने वाले छोटी अवधि के ऋण पर लगने वाला ब्याज रेपो दर (रिपर्चेज रेट) होती है। इसके विपरीत जब रिजर्व बैंक व्यावसायिक बैंकों से ऋण लेता है तो उस पर बैंकों को मिलने वाला ब्याज रिवर्स रेपो दर होती है। रेपो दर में वृद्धि के कारण आरबीआई से कर्ज लेने पर लागत बढ़ जाएगी और व्यावसायिक बैंकों के पास ग्राहकों को कर्ज देने के लिए धन की उपलब्धता में कमी आएगी। इसी तरह रिवर्स रेपो दर में वृद्धि के कारण व्यावसायिक बैंकों के लिए आरबीआई को कर्ज देना आकर्षक हो जाएगा, इससे बाजार में धन की उपलब्धता में कमी आएगी। मौद्रिक समीक्षा पर टिप्पणी करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा, ""नीतिगत उपायों से महंगाई में कमी आएगी, जो कि पहले ही कम होने लगी है। इससे विकास पर भी कोई असर नहीं प़डेगा।"" आरबीआई ने नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) और वैधानिक तरलता अनुपात (एसएलआर)में कोई बदलाव नहीं किया है। प्रमुख ब्याज दरों में वृद्धि के चलते अब आवास और ऑटोमोबाइल्स क्षेत्र के लिए कर्ज की दरों में वृद्धि की आशंकाएं बढ़ गई हैं। देश के सबसे ब़डे ऋण प्रदाता भारतीय स्टेट बैंक के अध्यक्ष ओ. पी. भट्ट ने कहा, ""दरों में वृद्धि की स्थितियां जरूर बनी हैं हालांकि अभी यह कर्ज की मांग की स्थिति पर निर्भर है।"" भट्ट ने कहा, ""दरों में वृद्धि के मामले पर हम स्थितियों पर विचार कर रहे हैं। हम आज और कल इस पर विचार करेंगे।"" आईसीआईसीआई बैंक की मुख्य कार्यकारी अधिकारी चंदा कोचर ने कहा, ""मैं महसूस करती हूं कि निकट भविष्य में आप कर्ज पर दरों में वृद्धि नहीं देखेंगे लेकिन कुछ समय बाद आप इसे देखेंगे।"" आरबीआई मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए गवर्नर डी. सुब्बाराव ने कहा, ""कर्ज की मांग बढ़ रही है, हमें उम्मीद है कि कर्ज और जमाओं पर ब्याज दरों में वृद्धि होगी।"" दूसरी ओर उद्योग समूहों ने कहा है कि रिवर्स रेपो दर में 50 आधार अंकों की वृद्धि के कारण निर्माण क्षेत्र पर बुरा असर प़डेगा। वाणिज्य एवं उद्योग संगठन फिक्की ने इस वृद्धि को अचंभित करने वाला कदम बताया है। फिक्की के अध्यक्ष रंजन भारती मित्तल ने कहा कि रिवर्स रेपो दर में इस वृद्धि से व्यापारिक बैंक आरबीआई को कर्ज देने के लिए आकर्षित होंगे और उद्योगों को कर्ज की उपलब्धता घट जाएगी। एसोचैम की अध्यक्ष पीरामल ने कहा, ""प्रमुख दरों में वृद्धि के चलते अब वाणिज्यिक बैंकों से कर्ज की दरों में 25-50 आधार अंकों की वृद्धि हो सकती है।"" भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के हरि भरतिया का कहना है, ""महंगाई दर दोहरे अंकों में होने से प्रमुख दरों में वृद्धि अनुमानित थी लेकिन अब सीआईआई को चिंता है कि इसका असर बैंकों के कर्ज की दरों पर भी प़डेगा।""
भारत समाचार
होम-ऑटो लोन होगा महंगा,आरबीआई ने की सख्ती





















