नई दिल्ली। सहजीवन (लिव इन) रिश्तों से संबंधित सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले में महिला के लिए रखैल शब्द के इस्तेमाल पर अतिरिक्त महाधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने शुक्रवार को नाराजगी जताई। इंदिरा जयसिंह सुप्रीम कोर्ट की चर्चित वकील तो है ही, देश की अतिरिक्त महान्यायवादी भी है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति मार्कडेय काटजू और न्यायमूर्ति टी.एस.ठाकुर की पीठ से कहा कि महिलाओं के संदर्भ में इस तरह के अति अपमानजनक शब्दों के इस्तेमाल की उम्मीद सर्वोच्चा न्यायालय के न्यायाधीशों से नहीं थी। इंदिरा जयसिंह ने कहा कि पीठ ने गुरूवार को जो फैसला दिया है, उसमें से इस शब्द को हटाए जाने के लिए वह अदालत जाएंगी। पीठ ने गुरूवार के अपने फैसले में कहा था कि किसी पुरूष मित्र के साथ रहने वाली महिला को घरेलू हिंसा अधिनियम-2005 के तहत गुजारा भत्ता का हक नहीं होगा। न्यायाधीशों ने कहा था, ""यदि किसी व्यक्ति के पास कोई "रख्ौल" है, जिसे वह पैसा देता है और उसे खासतौर से यौन उद्देश्यों के लिए या फिर नौकरानी के रूप में इस्तेमाल करता है, तो हमारी राय में यह रिश्ता शादी की प्रकृति का नहीं माना जाएगा।"" >गौरतलब है कि अपने फैसले में जजों ने गुरूवार को गुजारा भत्ता मांगने वाली लिव इन को जी रही महिला के लिए अंग्रेजी शब्द कीप का इस्तेमाल किया था। जिसे हिंदी में रखैल कहा जाता है। उनका रूख देखकर न्यायमूर्ति काटजू ने उनसे कहा कि वे अदालत के सामने खुद को मुकदमे तक ही सीमित रखें। दूसरे जज ठाकुर ने इस बीच उनसे पूछा कि क्या कीप की जगह काकबाइन शब्द का इस्तेमाल ज्यादा उचित रहेगा। इंदिरा> जयसिंह का जवाब था कि उनकी आपत्ति कीप यानी रखैल शब्द के इस्तेमाल पर है।
भारत समाचार
रखैल शब्द पर एतराज





















