गुवाहाटी। आतंकवाद से जु़डे मामलों की जांच करने वाली राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अदालत में दाखिल किए गए आरोप पत्र में खुलासा किया है कि असम में मौजूद आतंकवादी संगठनों को सरकारी कोष से लाखों रूपये मुहैया कराए जा रहे हैं।
एनआईए के आरोपपत्र के मुताबिक असम में राजनीतिक व्यक्तियों, आतंकवादियों, नौकरशाहों और ठेकेदारों के बीच साठगांठ है। एनआईए द्वारा 18 अक्टूबर को गुवाहाटी की विशेष अदालत में दाखिल किए गए दूसरे आरोपपत्र में कहा गया है कि उत्तरी काचर हिल्स स्वायत्त परिषद (एसीएचएसी) के चुने गए सदस्य प्रतिबंधित संगठन दीमा हालिम दाओगा (डीएचडी-जे) के जेवेल गार्लोसा ध़डे को सरकारी कोष से पैसा उपलब्ध करा रहे हैं। आईएएनएस के पास मौजूद एनआईए के आरोपपत्र की प्रति में कहा गया है, ""ऎसी बातें सामने आई हैं कि वर्ष 2006 के बाद डीएचडी-जे को परिषद के चयनित सदस्यों, ठेकेदारों और सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी कोष से धन मुहैया कराया गया।"" केंद्र सरकार ने वर्ष 2009 के जून में एनआईए को एक आपराधिक मामले की जांच सौंपी थी। इस मामले में असम पुलिस ने डीएचडी-जे के दो आंतकवादियों को अप्रैल में एक करो़ड रूपये नकद और हथियारों के साथ गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार किए गए दो आतंकवादियों फोजेंद्रा होजाई और बबूल केमपराई ने असम पुलिस को पूछताछ के दौरान बताया था कि एनसीएचएसी के मुख्य कार्यकारी सदस्य मोहित होजाई ने यह धन मुहैया करवाया था। एनआईए ने इस मामले में नेता मोहित होजाई तथा समाज कल्याण विभाग के पूर्व उपायुक्त आर. एच. खान, ठेकेदार जिबांगशू पाल और एक अन्य डीएचडी-जे के सदस्य जेवाल गारोलोसा सहित 16 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था। एनआईए द्वारा अभियुक्त बनाए गए 16 लोगों में से 14 लोग इस समय जेल में हैं। डीएचडी-जे के दोनों आतंकवादी जमानत पर छूट गए हैं। उधर, इस मामले में राज्य के एक मंत्री और विधायक के शामिल होने की मीडिया में आई रिपोर्ट के बावजूद एनआईए के आरोपपत्र में उनका नाम शामिल नहीं है। गौरतबल है कि इस मामले में पहला आरोप पत्र पिछले साल नवम्बर में दाखिल किया गया था, जिसमें एनआई ने विशेषतौर पर दो राजनीतिक दलों का नाम लिया था।





















