अगरता। बांग्लादेश सीमा पर आतंकवादी गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए त्रिपुरा में सशस्त्र सेना विशेष शक्तियां अधिनियम (एएफएसपीए) की अवधि छह महीना बढ़ा दी गई है। गृह विभाग के एक अधिकारी ने बताया, ""वैसे त्रिपुरा में आतंकवाद में महत्वपूर्ण कमी आई है लेकिन सरकार कुछ और समय तक कोई जोखिम नहीं लेना चाहती है।"" त्रिपुरा में विवादास्पद एएफएसपीए 52 साल पहले लागू किया गया था। यह कानून सुरक्षा बलों को आतंकवाद से निपटने के लिए विशेष शक्तियां प्रदान करता है।
अधिकारी ने बताया, ""बांग्लादेश की सीमा से लगे त्रिपुरा के कुछ हिस्सों में "नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा" (एनएलएफटी) और "त्रिपुरा टाइगर फोर्स" (एटीटीएफ) अब भी सक्रिय हैं।"" वर्ष 1997 से ही त्रिपुरा के 64 पुलिस स्टेशनों में से 34 में एएफएसपीए पूरी तरह से और छह में आंशिक रूप में लागू है। उन्होंने कहा, ""राज्य स्तरीय संयोजन समिति आतंकवाद-विरोधी कार्रवाइयों की निगरानी और पूरी स्थिति की समीक्षा कर रही है। समिति ने एएफएसपीए की अवधि छह महीने तक बढ़ाने की सलाह दी है। सरकार ने उसकी अनुशंसा को स्वीकार कर लिया है।"" मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और जनजातीय राजनीतिक दलों ने इस कानून को कठोर बताते हुए इसे निरस्त किए जाने की मांग की है। "इंडीजीनस नेशनलिस्ट पार्टी ऑफ त्रिपुरा" (आईएनपीटी) के प्रवक्ता श्रोता रंजन खीसा का कहना है, ""आतंकवाद विरोधी कार्रवाइयों के नाम पर सुरक्षा बल मासूम लोगों को शिकार बना रहे हैं।"" वैसे त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक प्रणय सहाय ने इन आरोपों का खंडन किया है। त्रिपुरा के अलावा असम, नागालैंड और मणिपुर में भी एएफएसपीए लागू है।





















