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भारत समाचार

सारे साल महंगाई मारती रही डंक

नई दिल्ली। वर्ष 2009 में वैश्विक मंदी के बीच भारत ने दूसरी सबसे तेजी से बढ़ाने वाली अर्थव्यवस्था का रूतबा हासिल किया लेकिन इन दौरान खाद्य वस्तुओं की महंगाई ने देश की आम जनता को काफी परेशानी में डाले रखा।
सरकार की प्रोत्साहन नीति एवं रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति के बल पर देश ने अप्रैल - सितंबर, 2009 के दौरान करीब सात फीसदी की आर्थिक वृद्धि दर हासिल की, भले ही लगभग पूरे साल निर्यात में गिरावट का रूख बना रहा। महंगाई के मोर्चे पर देश की मुद्रास्फीति की दर भले ही ज्यादा समय शून्य से नीचे रही, लेकिन खाद्य वस्तुओं की महंगाई ने आम आदमी का बजट चौपट किया। हाल ही में खाद्य मुद्रास्फीति की दर दशक के शीर्ष स्तर करीब 20 फीसदी पर पहुंच गई।
सरकार ने आर्थिक वृद्धि दर पर ध्यान केन्द्रित करते हुए देश के विभिन्न हिस्सों में सूखे एवं बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया जिससे देश मे खाद्यान्न की कमी की स्थिति पैदा हो गई और खाद्य वस्तुओं की कीमतें आसमान छूने लगीं। नए साल में मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी बरकरार रहने की आशंका बनी रहेगी, जिससे आर्थिक नीतियां प्रभावित होंगी।
मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाने के लिए रिजर्व बैंक 29 जनवरी को समीक्षा बैठक मे प्रमुख दरें बढ़ा सकता है इसके अलावा, वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी आम बजट में मुद्रास्फीति पर अकुंश लगाने के लिए कुछ उपाय कर सकते है तीन प्रोत्साहन पैकेजों की बदौलत भारतीय अर्थव्यवस्था ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया जिससे यह चीन के बाद दूसरी सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना हुआ है।

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