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भारत समाचार

सरकारी गोदामों में और है एक माह की चीनी

नई दिल्ली। आने वाले दिनों में देश में चीनी की गंभीर किल्लत होने और उसके दाम बढ़न की नौबत आ सकती है। सरकारी गोदामों में इस समय सिर्फ एक महीने जितनी ही शक्कर बची है जबकि इससे पहले तीन महीने का भंडार रहता था। ऎसे में चीनी के दाम आसमान छू सकते हैं और आम लोगों के लिए यह क़डवी हो सकती है। देश में चीनी बेहद कम है। ऎसे में न सिर्फ चीनी की कीमत और बढ़ेगी, बल्कि आने वाले समय में चीनी ही न मिले तो कोई ब़डी बात नहीं। लगातार बढ़ रहे चीनी के दामों पर नियंत्रण ला पाने में असमर्थता जताते हुए कृषि मंत्री ने शरद पवार ने साफ कह दिया है कि वह कोई ज्योतिषी नहीं हैं जो इसकी कोई समय सीमा निधारित कर सकते।
 उल्टे उन्होंने चीनी महंगी होने का ठीकरा उत्तर प्रदेश सरकार पर फो़ड दिया और कहा कि 20 लाख टन आयातित कच्ची चीनी बंदरगाहों पर प़डी हुई है लेकिन उसने प्रोसेसिंग की इजाजत नहीं दी है। देश में चीनी के सबसे ब़डे कारोबारी स्थल कोल्हापुर में चीनी की कीमत पिछले हफ्ते रिकॉर्ड 3972 रूपए प्रति क्विंटल तक पहुंच चुकी है। जबकि फुटकर बाजार में यह चीनी आते आते 45 से 50 रूपए प्रति किलो तक हो चुकी है। चीनी की कीमतों पर लगाम लगाने के लिए पिछले साल मई में सरकार ने चीनी के वायदाकारोबार पर रोक लगाई थी। उस समय चीनी की कीमत साढ़े बाइस सौ से तेईस सौ रूपए प्रति क्विंटल रूपए थी। यह रोक इस साल सितंबर तक के लिए है लेकिन अब इसका कोई फायदा नहीं है।
चीनी की बढ़ती कीमतों की कई वजहें हैं। कीमतें बढ़ने की संभावना को देखते हुए दुकानदारों ने जमाखोरी शुरू कर दी। देश में चीनी के उत्पादन में तो कमी आई ही है, इसके अलावा इस साल कृषि योग्य भूमि में भी कमी आई है। इतना ही नहीं, देश के भीतर अलग-अलग राज्यों में भी कीमतों में भारी फर्क है । मसलन चंडीगढ़ में कीमत 32 सौ रूपए प्रति क्विंटन तो कोल्हापुर में चार हजार रूपए प्रति क्विंटल प्रति क्विंटल है।

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