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भारतीय उत्पादों को स्वीकार करे चीन

पेईचिंग। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने वर्ष 2009 की तुलना में चालू वर्ष में विकास दर तेज रहने की संभावना व्यक्त की है और भारतीय सामानों की चीनी बाजार में अच्छी पहुंच उपलब्ध कराने की मांग की है।
शर्मा ने मंगलवार यहां एक सम्मेलन में कहा कि निर्यात के क्षेत्र में भारत पटरी पर लौट रहा है लेकिन बढते द्विपक्षीय व्यापार के मद्देनजर भारतीय सामान चीन में ज्यादा खपना चाहिए। भारतीय सामानों की चीनी बाजार में ज्यादा पहुंच की मांग शर्मा ने ऎसे समय में उठाई है जब दोनों देशों केबीच द्विपक्षीय व्यापार लगातार बढता जा रहा है। विश्व की दोनों बडी अर्थव्यवस्थाओं भारत और चीन के बीच वर्ष 2008 में द्विपक्षीय व्यापार 50 अरब डालर तक पहुंच गया था। इसी के साथ चीन भारत का दूसरा सबसे बडा व्यापारिक साझीदार बन गया। हालांकि वष्ाü 2009 मे वैश्विक व्यापार घटकर 43 अबर डालर पर आ गया। शर्मा ने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार में असंतुलन है जिसे उचित तरीके से दूर किए जाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि आर्थिक तेजी आने के साथ ही वर्ष 2010 में दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार को 60 अरब डालर तक ले जाने का लक्ष्य है। इस विषय पर बैठक में चर्चा हुई और मै अब भी आशान्वित हूं कि हम 2010 के लक्ष्य हो हासिल कर लेगे। शर्मा ने भारत में खासकर बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में ज्यादा चीनी प्रत्यक्ष विदेश निवेश की अपील की और कहा कि चीन में पहले से ही कई भारतीय कंपनियों मौजूद है। भारत से चीन को उपभोक्ता वस्तुओं की काफी निर्यात होता है।
वह चीन के लिए खासकर लौह अयस्क का तीसरा सबसे बडा आपूर्तिकर्ता देश है। लेकिन उपभोक्ता वस्तुओं के निर्यात पर ज्यादा ध्यान देने के अन्य वस्तुओं के निर्यात के मोर्च पर अच्छी प्रगति नहीं हुई है।

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