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पोखरण-2 टेस्ट पर विवाद बेमानी : प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री ने यह स्पष्टीकरण डीआरडीओ के पूर्व वैज्ञानिक के. संथानम की टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर दिया। संथानम ने कहा था कि पोखरण-दो परीक्षण पूरी सफल नहीं था। परीक्षणों के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के प्रतिनिधि रहे संथानम ने दावा किया था कि थर्मोन्यूक्लियर या हाइड्रोजन बम अपेक्षा के अनुरूप नहीं था, जिससे के सामरिक उद्देश्य पूरे नहीं होते। संथानम का कहना था कि भारत को और परमाणु परीक्षण करना चाहिए तथा सीटीबीटी पर हस्ताक्षर नहीं करने चाहिए, लेकिन पोखरण दो के समय डीआरडीओ के महानिदेशक रहे कलाम ने कहा कि भूकंपीय और रेडियोधर्मिता संबंधी माप सेमिले विवरण से यह स्थापित हुआ कि परियोजना टीम ने जिस उद्देश्य से थर्मोन्यूक्लियर परीक्षण किए, वह परिणाम उसे प्राप्त हो गया। 1998 में परमाणु ऊर्जा विभाग के अघ्यक्ष रहे आर. चिदंबरम ने भी संथानम की सलाह को बेतुका बताया है।




















