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भारत समाचार

जसवंत नहीं छोडेंगे लोक लेखा समिति अघ्यक्ष पद

नई दिल्ली, 1 सितंबर। भाजपा से निकाले गए नेता जसवंत सिंह ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के आग्रह उस आग्रह को ठुकरा दिया है, जिसमें उन्होंने उनसे संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) के अघ्यक्ष पद से इस्तीफा देने को कहा था। भाजपा ने उनके फैसले पर अफसोस जताते हुए कहा कि उन्हें मालूम होना चाहिए कि पार्टी छोडने या पार्टी से निकाले जाने वाले को क्या करना होता है। गुजरात सरकार द्वारा जिन्ना पर लिखी किताब पर लगाई गई पाबंदी के खिलाफ दायर याचिका के संबंध में सुप्रीम कोर्ट आए सिंह से भाजपा के आग्रह पर पूछे जाने पर दो टूक कहा, मैं पीएसी से इस्तीफा नहीं दूंगा। यह बात कोई पार्टी तय नहीं कर सकती है। इस बारे में निर्णय लोकसभा अघ्यक्ष करेंगी न कि कोई राजनीतिक पार्टी। भाजपा में लौटने की अटकलों पर भी विराम लगाते हुए उन्होंने कहा, आप इस बारे में चिंता नहीं करें, रास्ते बंद हो चुके हैं। पीएसी अघ्यक्ष पद से हटने से इनकार कर देने पर प्रतिक्रिया करते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता एम. वैंकेया नायडु ने कहा, पार्टी को छोड देने वाले या पार्टी से निकाल दिए जाने वाले को क्या करना होता है, यह जसवंत को मालूम है।
लोकसभा में पार्टी की उपनेता सुषमा स्वराज और एसएस अहलुवालिया ने सिंह से मुलाकात करके उनसे आग्रह किया था कि पार्टी चाहती है कि वह पीएसी का अघ्यक्ष पद छोड दें। पार्टी में रहते सिंह को यशवंत सिन्हा और गोपीनाथ मुंडे के साथ भाजपा ने पीएसी के सदस्य के रूप में नामित किया था।
संसदीय परम्परा के अनुसार सिंह के इन तीनों में सबसे वरिष्ठ होने के नाते उन्हें इस समिति का अघ्यक्ष बनाया गया था। मगर इसके कुछ ही दिनों बाद उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया। पीएसी की अघ्यक्षता संसदीय परंपरा के अनुसार मुख्य विपक्षी दल को दिए जाने की है।

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