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आरूषि हत्याकाण्ड में एक और नया मोड

जिससे आरूषि के साथ मृत्यु पूर्व कोई दुष्कर्म हुआ या नही उसका खुलासा नही हो पाया रहा है। इससे पहले जिला अस्पताल से 2008 में मेडिको लीगल रजिस्टर गायब होना जिसमें आरूषि के वजाडेनल स्वैब जांच के निष्कर्ष लिखे गये थे। अब स्लाईड का परिवर्तन होने के खुलासे से अब तक सीबीआई द्वारा की गई जांच पर भी प्रश्न चिन्ह लग गया है साफ है कि आरूषि के स्लाईड के साथ छेडछाड की गई है, डॉक्टर सुनील दोहरे जिन्होेेने आरूषि का पोस्टमार्टम किया था। उनका कहना है कि उन्होंने 16 मई को 12 बजे आरूषि का पोस्टमार्टम कर स्लाईड पुलिस को सौंप दी थी।
जिसका उल्लेख पोस्टमार्टम रजिस्टर में भी है। पोस्टमार्टम के बाद स्लाईड प्रत्यक्ष रूप से पैथोलॉजीस्ट विभाग को दी जाती है अगर पैथोलॉजीस्ट रिचा सक्सेना की माने तो उनका कहना है, उन्होंने स्लाईड की जांच की है, लेकिन स्लाईड उन्हें 16 मई को नही 17 मई को दी गई है। इससे गुत्थी और उलझ गई है, स्लाईड 24 घन्टे कहा रही पुलिस के पास या कही और एक और तत्कालीन सी.एम.सी. एस.पी. सिंघल बताते है कि डॉ. रिचा सक्सेना 16 व 17 मई को अवकाश पर थी।
ऎसे में उन्होंने 17 मई को भी स्लाईड जांच क्यों की। इसके लिये वो जिम्मेदार है। गौरतलब है कि 15 मई को 2008 को नोएडा के जलवायु विहार के सी-32 में 14 साल की आरूषि तलवार का कत्ल हुआ था और 2दिन बाद उसके घर से नौकर हेमराज की लाश छत पर मिली थी। तथा अपने बच्चें पर जान न्यौछावर करने वाले उसके पिता राजेश तलवार को इस बच्चें के कत्ल के इल्जाम में जेल जाना पडा। एक साल से अघिक समय निकल जाने के बाद भी आज तक आरूषि -हेमराज के कातिल का पता नही लगा है।




















