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उद्धव ने राज को धमकाया, 10 के बाद बोला तो खैर नहीं

अगर वे ऎसा करेंगे, तो उन्हें पक़डकर चूहे की तरह पिंजरे में डाल दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि दस तारीख के बाद अगर कुछ कहा, तो एक घाव दो निशान कर देंगे। उद्धव बोले, राज कहता है कि निरूपम को हमने ख़डा किया, वह शिवसेना को धोखा देकर चला गया, लेकिन तुम्हें भी तो हमने ही ब़डा किया। बाला साहब की गोद में बैठकर खाना खाया। अब तू पीठ पर वार कर सकता है, तो पराया क्यों नहीं। निरूपम तो परप्रांतीय है, लेकिन तुमने तो अपना होने के बावजूद पीठ में छुरा घोंपा। उन्होंने राज ठाकरे को धमकी के लहजे में कहा कि अगर दस अक्टूबर के बाद बाल ठाकरे या शिवसेना के लिए कुछ कहा तो फिर उसकी बहुत बुरी गत होगी।
उद्धव ठाकरे की यह धमकी मानुष की ल़डाई से ऊपर उठ चुकी है। ऎसा लगता है कि राज और उद्धव के बीच यह ल़डाई अब तू-तू मैं-मैं से उठकर सीधी ल़ड़ाई में तब्दील हो गई है। एक-दूसरे को नीचा दिखाना तो चुनाव के दौरान राजनीतिक पार्टियों में आम बात है, मगर घाव करने की धमकी सीधे-सीधे शह और मात की ल़डाई है। उद्धव का यह बयान राज ठाकरे के उस बयान के एक दिन बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि मराठियों की बात कोई और करता है, तो बाल ठाकरे को पसंद नहीं आती। राज ने उद्धव पर भी हमला करते हुए आरोप लगाया था कि उद्धव ने लोकसभा चुनाव में गुप्त मतदान करवाया था। राज अपने एजेंडे में एकदम राफ है। वह जानते हैं कि अगर उन्होंने सीधा हमला बाल ठाकरे और राज ठाकरे पर किया तो ज्यादा से ज्यादा जनता में उनकी बात पहुंच सकती है।
शिवसेना और मनसे की यह ल़डाई अब राजनीतिक न होकर व्यक्तिगत होती जा रही है। जाहिर है शिवसेना को मनसे से मराठी मानुष के वोट कटने का डर है, तो दूसरी ओर मनसे को लगता है कि वह इस मौके को हाथ से खाली न जाने दे। दरअसल यह झग़डा लोकसभा चुनाव के बाद ज्याद बढ़ गया। उसमें शिवसेना को मिली करारी हार के बाद बाल ठाकरे बौखला गए और उन्होंने शिवसेना के मुखपत्र सामना के संपादकीय में लिखा था कि राज से खून का रिश्ता खत्म हो गया। साथ ही यह भी कहा था कि जो भी शिवसेना का दुश्मन है, वह बाल ठाकरे का सबसे ब़डा दुश्मन है।




















