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भारत समाचार

शेयर ब्रोकरों को जुटानी प़डेगी ज्यादा पूंजी

मुंबई। शेयर बाजार में कारोबार के घंटे बढ़ने से ब्रोकरों को स्टॉक एक्सचेंजों के पास ज्यादा मनी डिपॉजिट करना प़डेगा। इसके अलावा उन्हें बैंकों से अतिरिक्तफंड जुटाने की भी जरूरत होगी। बैंकरों का कहना है कि कारोबारी घंटे बढ़ने से उनके कामकाज पर कोई असर नहीं प़डेगा। ऎसा इसलिए कि वे पहले से ही कमॉडिटी फ्यूचर सेगमेंट में काम कर रहे हैं जो 11 बजे रात तक चलता है। एक ब़डे ब्रोकिंग हाउस के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार सेबी के हालिया आदेश से ब्रेकरों को स्टॉक एक्सचेंजों या क्लीयरिंग बैंकों के पास ज्यादा मार्जिन मनी जमा कराने की जरूरत प़डेगी।
एक ब्रोकर के अनुसार इससे कामकाजी पूंजी में बढ़ोतरी होगी। हालांकि ब्रोकरों को तत्काल भुगतान की जरूरत पूरी करने के मकसद से ओवरड्राफ्ट की लिमिट बढ़ाने के लिए अपने बैंकों से संपर्क करना प़डेगा। ब्रोकरों को लगता है कि उन्हें अब कम से कम 10 फीसदी अतिरिक्त फंड की जरूरत प़ड सकती है। आरटीजीएस सिस्टम यानी रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट सुबह नौ से दोपहर 2.30 बजे तक काम करता है। इस सिस्टम में ब्रोकरों और कंपनियों को सौदे वाले दिन ही तुरंत फंड ट्रांसफर की सुविधा होती है। बैंकों ने खुद और इंडियन बैंक एसोसिएशन के जरिए रिजर्व बैंक से आरटीजीएस की समय सीमा शाम पांच तक करने का अनुरोध किया है। ऎसा होने पर फंड की जरूरत के मार्चे पर ब्रोकर कम से कम प्रभावित होंगे।

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