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साल भर में बढ़ेगी चीनी की मिठास

कृषि एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री शरद पवार ने आवश्यक वस्तु (संशोधन और विधिमान्यकरण) विधेयक 2009 पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए लोकसभा में यह भरोसा दिलाया। इसी के साथ सदन ने विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया जबकि इस संबंध में लाए गए अध्यादेश को वापस लेने के राजू शेट्टी के संकल्प को खारिज कर दिया।
उन्होंने कहा कि यह विधेयक लेवी चीनी की कीमतों के निर्धारण से जु़डा हुआ है। गन्ना किसानों व आम उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के प्रति सरकार के गंभीर होने का दावा करते हुए पवार ने कहा कि उचित एवं लाभकारी मूल्य की नीति पर अमल किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि नई व्यवस्था किसानों के अनुकूल साबित होगी। लेवी चीनी का जिक्र करते हुए पवार ने कहा कि 20 साल पहले भारत सरकार 70 फीसदी तक चीनी मिलों से लेवी के रूप में लेती थी। लेकिन बाद के दिनों में इससे कटौती होती गई और यह एक समय 10 फीसदी तक पहुंच गई।
पवार ने कहा कि सरकार कमजोर तबके को ध्यान में रखकर सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए लेवी चीनी लेती है और इसकी मात्रा बढ़ाते हुए 20 फीसदी करने की नीति है। उन्होंने कहा कि लेवी चीनी की कीमतें केन्द्र तय करता है और उच्चातम न्यायालय के आदेशों के तहत पिछले कई वर्षो के दौरान की लेवी चीनी की कीमतों के पुनर्निधारण के कारण सरकार को चीनी मिलों को करीब 14 हजार करो़ड रूपए देने है। उन्होंने कहा कि नई पद्धित में किसानों को पुराने व्यवस्था की तुलना में अधिक फायदा होगा।
चीनी की कीमतों में वृद्धि को लेकर हो रही आलोचना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि चीनी की मांग करीब 230 लाख टन है जबकि इसकी उपलब्धता 150 टन से भी कम होने के कारण मांग एवं आपूर्ति में काफी अंतर हो गया।




















