लंदन/नई दिल्ली। मुम्बई में दो साल पहले हुए आतंकवादी हमले की साजिश में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलीजेंस (आईएसआई) पूरी तरह से शामिल थी। पाकिस्तानी-अमेरिकी आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली ने भारतीय जांचकर्ताओं से यह बात कही थी। साथ ही हेडली ने यह भी कहा कि मुम्बई पर हमले के बाद उसने दिल्ली में संभावित हमले के लिए प्रधानमंत्री निवास और सैन्य ठिकानों की रेकी की थी।
ब्रिटेन के समाचार पत्र "द गार्जियन" ने भारतीय अधिकारियों द्वारा हेडली से की गई पूछताछ की रिपोर्ट के हवाले से पूरी साजिश में आईएसआई की संलिप्तता का उल्लेख किया है। इस साजिश को अंजाम देने के लिए आईएसआई के अधिकारियों ने आतंकवादी सरगनाओं के साथ कई बैठकें की थी। यह रिपोर्ट 109 पृष्ठों की है और इसमें आईएसआई द्वारा मुम्बई को दहलाने की साजिश में पूरी मदद देने की बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार पूछताछ के दौरान शिकागो की जेल में बंद हेडली ने बताया कि उसने 26 नवम्बर, 2008 की घटना की साजिश के सिलसिले में आईएसआई के अधिकारियों और आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के कई शीर्ष आतंकवादियों से मुलाकात की थी। मुम्बई हमले के लिए पाकिस्तानी संगठन लश्कर को ही जिम्मेदार माना जाता है। हेडली ने यह भी कहा कि पूरे हमले को अंजाम देने तक वह आईएसआई के संपर्क में बना रहा और इसके लिए उसे इस पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी की ओर से पूरी मदद दी गई। मुम्बई हमले में 166 लोग मारे गए थे। पूछताछ के दौरान हेडली ने बताया कि आईएसआई ने कम से कम उसके दो दौरों का वित्तीय खर्च उठाया और वह आईएसई को नियमित रूप से अपने काम की जानकारी देता था। रिपोर्ट में कहा गया कि आतंकवादियों पर आईएसआई का नियंत्रण अव्यवस्थित रूप में था और यह भी हो सकता है कि उच्चा अधिकारी इस गठजो़ड से अवगत न हो या इस हमले की साजिश की व्यापकता के बारे में नहीं जानते हों। भारतीय जांचकर्ताओं ने इस साल जून में अमेरिका की जेल में हेडली से 34 घंटे तक पूछताछ की थी। हेडली ने कहा, ""आईएसआई को भारत पर हमले की जरूरत को लेकर कोई अस्पष्टता नहीं थी।"" हेडली ने कहा कि एजेंसी का लक्ष्य कश्मीर स्थित संगठनों में उपलब्धि मिलने का भाव पैदा करके उन्हें विभाजन से रोकना था। यह पाकिस्तान की धरती से भारत पर हुआ हमला था। उसने सैन्य खूफिया तंत्र के मेजर कामरान के साथ और मेजर इकबाल और मेजर समीर अली के साथ हुई अपनी बैठकों का खुलासा किया। उसने कहा कि आईएसआई के महानिदेशक लेफिटिनेंट जनरल शुजा पाशा ने हमले के बाद इसके बारे में बातचीत के लिए लश्कर-ए-तैयबा के एक प्रमुख आतंकी से जेल में मुलाकात की थी। इसके अलावा हेडली ने भारतीय जांचकर्ताओं के दल को बताया था कि उसने एक और संभावित हमले के लिए दिल्ली में प्रधानमंत्री निवास सहित प्रमुख रक्षा ठिकानों की रेकी की थी।
सूत्रों के मुताबिक हेडली ने भारतीय जांचकर्ताओं से अमेरिकी जेल में पूछताछ के दौरान कहा कि वह मार्च 2009 में दिल्ली गया था। मुम्बई में हमले के 10 महीने बाद हेडली में अपनी दिल्ली की रेकी के दौरान सात रेसकोर्स रोड, प्रधानमंत्री के आधिकारिक निवास, रक्षा भवन और नेशनल डिफेंस कॉलेज (एनडीसी) की वीडियोग्राफी की थी। हेडली ने कहा कि उसने एनडीसी में बहुत कम सुरक्षा देखी जिसके चलते वह सम्भावित लक्ष्य था। हेडली ने कहा कि प्रधानमंत्री निवास की सुरक्षा को तो़डना काफी मुश्किल था और रक्षा भवन पर हमले को लेकर पाकिस्तानी आतंकियों ने रूचि नहीं दिखाई। सूत्रों के मुताबिक हेडली ने कहा था कि उसके पाकिस्तानी आका एनडीसी पर हमला करने के इच्छुक नहीं थे और उन्होंने नेपाल में किसी अज्ञात व्यक्ति की योजना पर बातचीत शुरू कर दी थी।
भारत समाचार
मुंबई हमले के बाद दिल्ली थी अगला निशाना - हेडली





















